जिनपिंग से मिलेंगे तारिक रहमान, क्या भारत के खिलाफ बुना जा रहा है कोई बड़ा जाल? तीस्ता प्रोजेक्ट पर टिकी नजरें

Tarique Rahman China Visit: बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान 3 दिवसीय चीन दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान तीस्ता नदी परियोजना पर होने वाले समझौतों और रणनीतिक साझेदारी ने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
Tariq Rahman to meet Xi Jinping; is a major plot being hatched against India? All eyes on the Teesta project.
चीन पहुंचे तारिक रहमान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Tarique Rahman China Visit Jinping Meeting: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपनी पत्नी जुबैदा रहमान के साथ तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर चीन पहुंचे हैं। इस हाई-प्रोफाइल दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर चर्चा करना है।

हालांकि, इस यात्रा ने नई दिल्ली में कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें भारत की सीमा के बेहद करीब स्थित 'तीस्ता नदी परियोजना' पर बड़े ऐलान की संभावना जताई जा रही है।

समर दावोस फोरम में शिरकत

अपनी यात्रा की शुरुआत में प्रधानमंत्री रहमान डालियान पहुंचे, जहां वह वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) द्वारा आयोजित 'न्यू चैंपियंस की 17वीं सालाना बैठक' (समर दावोस फोरम 2026) में हिस्सा लिए। मंगलवार शाम को चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग की ओर से उनके सम्मान में एक विशेष दावत का भी आयोजन किया गया। अपने कार्यक्रम के तहत, रहमान कजाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ भी बैठक करेंगे और इसके बाद हाई-स्पीड ट्रेन से बीजिंग के लिए रवाना होंगे, जहां वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे।

तीस्ता प्रोजेक्ट: भारत के लिए रणनीतिक चुनौती

इस दौरे का सबसे संवेदनशील पहलू 'तीस्ता कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट' है। यह परियोजना भारतीय सीमा से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भारत इस क्षेत्र की संवेदनशीलता और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' (चिकन नेक) से इसकी नजदीकी को लेकर बेहद सतर्क है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष देश से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा रास्ता है, और वहां चीन की किसी भी प्रकार की मौजूदगी या प्रभाव को भारत अपनी सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देखता है।

चीन का बढ़ता प्रभाव

चीन के विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को बांग्लादेश की नई सरकार के साथ 'कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक कोऑपरेटिव पार्टनरशिप' को बढ़ावा देने के अवसर के रूप में देखा है। प्रवक्ता गुओ जियाकुन के अनुसार, दोनों देश हाई-क्वालिटी 'बेल्ट एंड रोड' सहयोग और मल्टीलेटरल तालमेल को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

तीस्ता परियोजना के तहत नदी तंत्र को नियंत्रित करने के लिए रिवर ट्रेनिंग, ड्रेजिंग, नए तटबंधों का निर्माण और सूखे मौसम में जल प्रबंधन के लिए स्टोरेज बनाने जैसे काम प्रस्तावित हैं। जनवरी 2026 में बांग्लादेश वॉटर डेवलपमेंट बोर्ड और चीनी सरकारी कंपनी 'पावर चाइना' ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।

क्षेत्रीय कूटनीति पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में चीन का बढ़ता निवेश और रणनीतिक दखल दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। जहां चीन इसे 'प्रैक्टिकल सहयोग' का नाम दे रहा है, वहीं भारत इस बात पर कड़ी नजर रखे हुए है कि तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर बीजिंग और ढाका के बीच क्या अंतिम सहमति बनती है। प्रधानमंत्री रहमान की इस यात्रा के नतीजे आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश और भारत-चीन संबंधों की नई दिशा तय करेंगे।

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