बांग्लादेश में खूनी कोहराम! चाय की दुकान पर बैठे पत्रकारों पर अंधाधुंध गोलीबारी, दहल उठा खुलना शहर
Bangladesh Violence: बांग्लादेश के खुलना में चार पत्रकारों पर हुए जानलेवा हमले की भ्रष्टाचार-रोधी संस्था TIB ने कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रेस की आजादी पर बड़ा हमला बताया है।
- Written By: अक्षय साहू
बांग्लादेश में पत्रकारों पर जानलेवा हमला (AI जेनरेटेड इमेज)
Bangladesh Khulna Journalists Attack: बांग्लादेश में इन दिनों हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ देश में राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है, तो दूसरी ओर पत्रकारों को निशाना बनाकर गोलीबारी की घटना सामने आई है। भ्रष्टाचार-रोधी संस्था ने खुलना शहर में पत्रकारों को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे देश में स्वतंत्र पत्रकारिता और प्रेस की आजादी पर हमला बताया है।
खुलना में चार पत्रकारों पर 15 जुलाई की सुबह बंदूकधारियों ने गोलीबारी की। घटना के दौरान सभी पत्रकार अपना काम खत्म करने के बाद एक चाय की दुकान के बाहर बैठे थे। गोलीबारी में घायल हुए पत्रकारों में बांग्लादेशी अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड के खुलना संवाददाता अवल शेख भी शामिल थे। अवल शेख को हमले में गोली के छर्रे लगे थे।
पत्रकारों का केस फाइल करने में आनाकानी
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (TIB) ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि पत्रकारों का केस फाइल करने में आनाकानी करना डर के माहौल और अधिकारियों पर बढ़ते भरोसे की कमी को दिखाता है। टीआईबी ने जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उन्हें जिम्मेदार ठहराने के लिए तुरंत, बिना किसी भेदभाव के और पूरी जांच की मांग की।
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बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून ने टीआईबी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इफ्तेखारुज्जमां के हवाले से कहा, यह अभी साफ नहीं है कि हमला खास तौर पर किसी पत्रकार को टारगेट करके किया गया था या किसी खास न्यूज रिपोर्ट का बदला लेने के लिए किया गया था। इसमें कोई शक नहीं है कि पत्रकारों पर यह हथियारों से लैस हमला मीडिया की आजादी और बोलने की आजादी के अधिकार पर हमला है।
निष्पक्ष और प्रभावी जांच की मांग
इफ्तेखारुज्जमां ने जोर देकर कहा कि किसी भी तरह के असर या बेवजह की देरी के आगे झुके बिना, एक निष्पक्ष और प्रभावी जांच होनी चाहिए ताकि न सिर्फ अपराधियों की पहचान हो सके, बल्कि उन लोगों की भी पहचान हो सके जिन्होंने हमले की योजना बनाई और आदेश दिया था और उन्हें सजा मिल सके।
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उन्होंने कहा, सिर्फ केस करना काफी नहीं है। हमले के पीछे का असली मकसद पता लगाना, यह पहचानना कि कौन जिम्मेदार था, यह किसके कहने पर किया गया और यह पता लगाना कि क्या यह पत्रकारों के प्रोफेशनल काम से जुड़ा था, यह भी उतना ही जरूरी है। नहीं तो, अन्य मामलों की तरह यह घटना भी उन मामलों की लंबी लिस्ट में शामिल हो सकता है, जिनमें सजा से बच निकलने की बात कही गई है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वो पीड़ितों की पूरी मदद करेंगे।
