शेख हसीना की समर्थक जातीय पार्टी के मुख्यालय में लगाई गई आग, बांग्लादेश की है तीसरी सबसे बड़ी पार्टी
बांग्लादेश में शेख हसीना और उनके समर्थकों के लिए मुसीबतें कम नहीं हो रहे हैं। बांग्लादेश में हमलावरों ने गुरुवार रात को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की समर्थक जातीय पार्टी के मुख्यालय में आग लगा दी।
- Written By: साक्षी सिंह
शेख हसीना की समर्थक जातीय पार्टी के मुख्यालय में अराजकतत्वों द्वारा आग लगा दी गई।
ढाका: बांग्लादेश में शेख हसीना और उनके समर्थकों के लिए मुसीबतें कम नहीं हो रहे हैं। बांग्लादेश में हमलावरों ने गुरुवार रात को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की समर्थक जातीय पार्टी के मुख्यालय में आग लगा दी। एक खबर में यह जानकारी दी गई है।
हालांकि, इस हमले में किसी के घायल होने को लेकर कोई जानकारी नहीं है और न ही मुख्यालय पर हमले की किसी ने जिम्मेदारी ली है। टीवी चैनल और अन्य मीडिया संस्थानों ने बताया कि हमलावरों ने ढाका के बिजॉय नगर क्षेत्र में स्थित पार्टी मुख्यालय पर धावा बोला। उनकी वहां मौजूद पार्टी सदस्यों के साथ झड़प हुई और अंतत: हमलावरों ने परिसर में आग लगा दी।
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खबरों के मुताबिक, नुकसान की अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है। अग्निशमन सेवा और नागरिक सुरक्षा के अधिकारी रशीद बिन खालिद ने न्यूज एजेंसी एपी को फोन पर बताया कि अग्निशमन दल घटनास्थल पर पहुंच गया है। जातीय पार्टी बांग्लादेश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इसकी स्थापना 1980 के दशक में पूर्व सैन्य तानाशाह एच.एम. इरशाद ने की थी।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, बीते जुलाई और अगस्त महीने में आरक्षण के खिलाफ बांग्लादेश में छात्रों ने सरकार विरोधी प्रदर्शन किया। धीरे धीरे ये प्रदर्शन आंदोलन को रूप ले लिया। इसके बाद छात्रों का ये आंदोलन हिंसक होते चला गया। जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। छात्र आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
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हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार किया, लेकिन बाद में छात्रों ने शेख हसीना से इस्तीफे की मांग करने लगे थे। उग्र हुई भीड़ ढाका में पीएम आवास की तरफ बढ़ने लगी थी। बांग्लादेश सेना ने हसीना सरकार में हस्तक्षेप किया। सेना के दबाव में शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। साथ ही उन्हें देश भी छोड़ना पड़ा। शेख ने भारत में शरण लिया। फिलहाल शेख हसीना पर फूटा जनता का गुस्सा उनके समर्थकों को सामना करना पड़ रहा है।
