

Hindu Trader Killed In Balochistan: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां के नोश्की शहर में अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने सरेआम एक हिंदू व्यापारी राकेश कुमार की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस कायराना हमले के बाद बलूचिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और प्रमुख मीडिया आउटलेट 'डॉन' समाचार पत्र के अनुसार, यह दर्दनाक वारदात शुक्रवार को घटित हुई। घटना बलूचिस्तान के नोश्की शहर के कादिराबाद स्टॉप इलाके में स्थित नोश्की बाजार की है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को कुछ हथियारबंद लोग अचानक राकेश कुमार की दुकान के भीतर जबरन घुस आए। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, जब राकेश कुमार ने हमलावरों की इस जबरदस्ती का विरोध किया, तो उन्होंने उन पर सीधे गोली चला दी। गोली मारने के तुरंत बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
इस निर्मम हत्याकांड ने बलूचिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उनकी स्थिति को लेकर चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात हथियारबंद हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक किसी भी संगठन या समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय विधानसभा के सदस्य गुरपाल सिंह ने इस जघन्य हत्याकांड की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने शनिवार को जारी एक बयान में इसे देश-विरोधी और बलूचिस्तान-विरोधी तत्वों की बेहद कायराना हरकत करार दिया।
गुरपाल सिंह ने अपने बयान में जोर देते हुए कहा, "हिंदू समुदाय सदियों से बलूचिस्तान का अभिन्न हिस्सा रहा है और उसने बार-बार पाकिस्तान तथा बलूचिस्तान के प्रति अपनी निष्ठा साबित की है।" इसके साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान सरकार और वहां की कानून-प्रवर्तन एजेंसियों से मांग की है कि राकेश कुमार की हत्या की तत्काल गहन जांच की जाए और आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर न्याय के कटघरे में लाया जाए।
यह घटना दर्शाती है कि बलूचिस्तान प्रांत लंबे समय से लगातार हिंसा और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठनों ने कई बार पाकिस्तान के सुरक्षा बलों और सेना को निशाना बनाकर हमले किए हैं। ऐसी अशांत सुरक्षा स्थितियों के बीच अल्पसंख्यक समुदाय के किसी व्यक्ति को निशाना बनाए जाने से सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं।