भारतीयों की Kailash Mansarovar Yatra पर नेपाल का बड़ा कदम; चीन से कोटा बढ़ाने की मांग! जानिए क्या है वजह?

Kailash Mansarovar Yatra: नेपाल ने चीन से भारतीय यात्रियों का कोटा 24,000 से बढ़ाकर 40,000 करने की मांग की है। भारत से बड़ी संख्या में यात्री इस पवित्र यात्रा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
Kailash Mansarovar Yatra: Nepal asks China to increase Indian pilgrim quota to 40,000
कैलाश मानसरोवर (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Kailash Mansarovar Yatra Indian Pilgrim Quota: नेपाल सरकार ने भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए एक बहुत बड़ा और अहम कदम उठाया है। नेपाल पर्यटन विभाग और वहां के स्थानीय व्यवसायी भारतीय नागरिकों का पूरे दिल से स्वागत करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इसके लिए नेपाल ने चीन सरकार से एक अहम और बड़ी आधिकारिक मांग रखी है। नेपाल लगातार चाहता है कि भारतीय यात्रियों का कोटा इस साल हर हाल में जल्द बढ़ाया जाए।

यह कैलाश यात्रा दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी और गहरे सांस्कृतिक संबंधों को और भी ज्यादा मजबूत बनाती है। भारतीय यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए चीन का मौजूदा तय किया गया कोटा बहुत ही कम साबित हो रहा है। इसलिए नेपाल सरकार और वहां के ट्रैवल एजेंट इसे बढ़ाने की लगातार और मजबूत कोशिश कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण कदम से नेपाल के स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा।

नेपाल की चीन से बड़ी मांग

नेपाली पर्यटन उद्यमियों के अनुसार चीन ने इस साल भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए 24,000 का कोटा तय किया है। हालांकि नेपाल ने चीन से इसे बढ़ाकर 40,000 करने की मांग की है क्योंकि यात्रियों की मांग बहुत अधिक है। पिछले साल यह कोटा 20,000 था और इस बार इसमें 15,000 अतिरिक्त की भारी मांग की गई है। भारत सरकार लिपुलेख और नाथू ला दर्रे से यात्रा की अनुमति देती है लेकिन यह संख्या काफी सीमित है। भारत सरकार हर साल प्रति मार्ग केवल 500 लोगों यानी कुल 1,000 यात्रियों की सीमा तय करती है। इस वजह से अधिकांश भारतीय तीर्थयात्री नेपाल के आसान रास्ते से निजी वाहन से यात्रा करना ज्यादा पसंद करते हैं।

नेपाल के रास्तों से फायदा

वर्तमान में नेपाल के रास्ते कैलाश जाने के चार प्रमुख मार्ग खुले हुए हैं जिनका यात्री इस्तेमाल करते हैं। हिल्सा मार्ग पर यात्रियों की भारी संख्या बढ़ने से नेपाल के स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। सिमकोट और हिल्सा में दर्जनों होटल और कई छोटे लॉज भारतीय तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए खुले हुए हैं।

इस बड़ी यात्रा से हुमला जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में कुली, गाइड और होटल कर्मचारियों की भारी मांग पैदा हुई है। स्थानीय उत्पादों जैसे सेब, अखरोट और बीन्स के लिए अब एक बहुत बड़ा और नया बाजार बन गया है। किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर तेजी से व्यावसायिक सब्जी खेती की ओर अपना पूरा रुख कर रहे हैं।

यात्रा पैकेज की नई कीमतें

इस वर्ष ईंधन और खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण कैलाश यात्रा के पैकेज काफी महंगे हो गए हैं। 10 दिवसीय रसुवागढ़ी-केरंग पैकेज की कीमत अब प्रति व्यक्ति लगभग 1,700 डॉलर हो गई है। यह कीमत पिछले वर्ष की तुलना में बहुत बढ़ी है क्योंकि पहले यह 10 दिन का पैकेज 1,500 डॉलर था। नेपालगंज-सिमकोट-हिल्सा मार्ग की आठ दिवसीय यात्रा का खर्च अब 1,550 डॉलर हो गया है जो पहले 1,300 डॉलर था। इस रूट पर यात्री पहले छोटे विमान और फिर हेलीकॉप्टर के जरिए हिल्सा पर्वत तक आसानी से पहुंचते हैं। एक हेलीकॉप्टर प्रतिदिन 15 चक्कर लगाता है और प्रति उड़ान केवल 4 यात्री ही सफर करते हैं।

चीनी अधिकारियों ने हाल ही में तीन दिनों के लिए मार्ग बंद कर दिया था, लेकिन अब यात्रा फिर से शुरू हो गई है। गुरुवार से शनिवार के बीच 1,200 से अधिक भारतीय तीर्थयात्री इस मार्ग से रवाना होने वाले हैं। टच कैलाश ट्रेवल के प्रबंध निदेशक बसु अधिकारी ने बताया कि पूछताछ लगातार और बहुत ही तेजी से बढ़ रही है।

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