युद्ध की कगार पर अमेरिका-ईरान! होर्मुज में भिड़ीं दोनों सेनाएं, US ने तबाह किए तेहरान के रडार सेंटर
America Iran Drone Attack: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य टकराव हुआ है। अमेरिका ने ईरान के 4 ड्रोन मार गिराए और जवाबी कार्रवाई में उसके रडार ठिकानों पर हमला किया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक फोटो, सो. AI
America Iran Drone Attack Strait of Hormuz: मीडिल ईस्ट में शांति की कोशिशों को एक और बड़ा झटका लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शनिवार को अमेरिका और ईरान की सेनाएं एक बार फिर आमने-सामने आ गई हैं। इस सैन्य टकराव में दोनों ओर से उकसावे की कार्रवाई के आरोप लगाए गए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
चेतावनी के लिए चलाई गोलियां
ईरान की अर्धसरकारी मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरानी सेना ने शनिवार सुबह होर्मुज के पास लारक द्वीप के करीब ‘चेतावनी’ के तौर पर कई राउंड गोलियां दागीं। ईरान का दावा है कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की तैनाती में कुछ संदिग्ध हरकत देखने को मिली थी, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। यह जगह ईरानी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के तट से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
अमेरिका ने तबाह किए रडार साइट्स
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने ईरान के दावों के बीच अपनी बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने होर्मुज की ओर कई हमलावर ड्रोन दागे थे, जिनमें से 4 ड्रोनों को अमेरिकी सेना ने मार गिराया।
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जवाबी कार्रवाई करते हुए, अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित ‘तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर भीषण हमला कर उन्हें निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे थे। जिसके बाद हमला कर जवाब दिया गया।
ईरान की क्षमता हुई कम
इस झड़प के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक टीवी इंटरव्यू में दावा किया कि ईरान की सैन्य शक्ति अब काफी कम हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब केवल 21-22 प्रतिशत मिसाइलें ही शेष बची हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका प्रशासन इस संघर्ष को सफलतापूर्वक समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अमेरिका किसी न किसी तरह से जीतेगा।
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सीजफायर पर गहराया संकट
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत चल रही थी। हालांकि, इसी हफ्ते ईरानी ड्रोन द्वारा कुवैत के हवाई अड्डे पर किए गए हमले, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई थी जिसके बाद हालात बिगाड़ गए थे। इसके अलावा, इजरायल और लेबनान के बीच जारी लड़ाई और हिजबुल्लाह द्वारा शांति समझौते को खारिज किए जाने ने भी स्थिति को और कठिन बना दिया है।
