पश्चिम बंगाल के स्कूली किताबों में होगा बदलाव, पानी की जगह जल और अब्बा की जगह बाबा जैसे शब्दों को मिलेगी जगह

West Bengal Government: बंगाल के स्कूली किताबों शुभेंदु सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार किताबों से कुछ शब्दों को बदलने का विचार कर रही है। 15 दिनों के भीतर समिति सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी।
suvendu adhikari
बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारीसोर्स-सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • पश्चिम बंगाल के पाठ्यपुस्तकों के शब्दों में बदलाव की तैयारी

  • अब्बा की जगह बाबा और पानी की जगह लिखा जाएगा जल

  • 15 दिनों के भीतर पाठ्यक्रम समिति, पश्चिम बंगाल सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट

There Will Be Changes To School Textbooks In West Bengal: बंगाल सरकार स्कूली शिक्षा में बड़े बदलाव करने के मूड में नजर आ रही है। ये बदलाव बंग्ला भाषा की किताबों में जल्द देखने को मिल सकते हैं। इन बदलावों के तहत, फारसी और अरबी मूल के कई शब्दों को हटाकर उनकी जगह ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें बंगाली भाषा के अधिक पारंपरिक शब्दों के रूप में देखा जाता है।

बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी सरकार की तरफ से गठित पाठ्यपुस्तक समीक्षा समिति ने किताबों में प्रयोग होने वाले कुछ शब्दों को बदलने, इतिहास के पाठ्यक्रम में संशोधन करने और नई विषय वस्तु को जोड़ने की सिफारिस की है। सरकार की तरफ से प्रस्तावित शब्दों में पानी की जगह जल और अब्बा की जगह बाबा जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाएगा।

पाठ्यपुस्तक के शब्दों में बदलाव

ये प्रस्तावित बदलाव कक्षा 1 से 10 तक की पाठ्यपुस्तकों के लिए हैं। इनमें आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले शब्द शामिल हैं, जैसे-पानी (जल), रंगधोनु (इंद्रधनुष), किताब (पुस्तक), इमारत (भवन), आसमान (आकाश), फज्र (भोर), गोसोल (स्नान) और दोस्त (मित्र)।

सरकारी सूत्रों ने इस कवायद को पाठ्यपुस्तकों की भाषा को पश्चिम बंगाल में प्रचलित पारंपरिक और मानक बंगाली भाषा के अनुरूप बनाने की कोशिश बताया है।

क्या कर रही है समिति विचार

यह प्रस्ताव अगस्त में पाठ्यपुस्तक समिति की तीन दिवसीय आवासीय बैठक के बाद चर्चा में आया। इस बैठक के दौरान, सदस्यों ने कुछ ऐसे शब्दों की ओर इशारा किया, जो उनके अनुसार पाठ्यक्रम में अस्वाभाविक रूप से शामिल किए गए थे।

शब्दावली में प्रस्तावित बदलाव, आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यक्रम में किए जाने वाले एक सीमित संशोधन का हिस्सा होंगे। कुल संशोधन 10 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगा पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष देबाशीष चट्टोपाध्याय ने बताया कि समिति कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में कुछ शब्दों को बदलने पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा कि 15 दिनों के भीतर पश्चिम बंगाल सरकार को एक विस्तृत सिफारिश सौंपी जाएगी, जिसके बाद सरकार इस प्रस्ताव पर विचार करेगी।

suvendu adhikari
बंगाल के मालदा में BJP कार्यकर्ता की हत्या, पहले धारदार से हथियार किया हमला, फिर मारी गोली, इलाके में तनाव

हमने पानी को कभी पानी नहीं कहा है

पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष देबाशीष चट्टोपाध्याय ने कहा कि समिति उन शब्दों की समीक्षा करना चाहती है जिन्हें वह विदेशी मानती है और जो, उनकी राय में अविभाजित बंगाल में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल नहीं किए जाते थे।

उन्होंने कहा, जो शब्द विदेशी हैं और सुनने में अच्छे नहीं लगते, जो हमारे कानों को सुखद नहीं लगते और जो शब्द लंबे समय से अविभाजित बंगाल में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल नहीं होते थे।

उन्होंने विशेष रूप से पानी के लिए पानी शब्द के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि इस शब्द का पारंपरिक रूप से उस तरह इस्तेमाल नहीं होता था, जिसे समिति बंगाली पाठ्यपुस्तकों के लिए उचित मानती है।

suvendu adhikari
बदला ले रही है BJP! नसीरुद्दीन शाह ने SRFTI छात्रों के प्रदर्शन का किया समर्थन, कहा- खतरे में बच्चों का भविष्य

15 दिनों में सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट

पाठ्यक्रम समिति 15 दिनों के भीतर बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी को अपनी विस्तृत सिफारिशें सौंप देगी। इसके बाद सरकार आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यक्रम में किए जाने वाले सीमित बदलावों के हिस्से के रूप में इन प्रस्तावों पर विचार करेगी।

Navbharat Live
navbharatlive.com