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बंगाल चुनाव का ‘रक्त-चरित्र’, 20 सालों का खौफनाक डेटा; देखें किस चुनाव में कितनी मौतें?

West Bengal Election Violence: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में होने वाली राजनीतिक हत्याओं में सबसे अधिक दर पश्चिम बंगाल में रही है। हालांकि, 2026 में यह कम हुआ है।

  • Written By: मनोज आर्या
Updated On: May 03, 2026 | 08:37 PM

बंगाल में अब तक हुए चुनावी हिंसा के आंकड़े, (सोर्स- AI)

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Election Related Violence In West Bengal: पश्चिम बंगाल में हिंसा की छिटपुट घटनाओं के साथ ही दोनों चरणों का मतदान खत्म हो चुका है। पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान के दौरान अधिकारिक तौर पर हिंसा की कोई भी घटना दर्ज नहीं हुई। हालांकि, दूसरे चरण में 29 अप्रैल को दो विधानसभा क्षेत्रों के कुछ जगहों पर हंगामा और हिंसा देखने को मिला। जहां सुरक्षाबलों को लाठीचार्ज भी करनी पड़ी थी।

इसके अलावा चुनाव आयोग को डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम के 15 बूथों पर शनिवार, (2 मई) को दोबारा मतदान करना पड़ा। वहीं, फालता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 बूथों पर फिर से 21 मई को वोटिंग होगी और 24 मई को मतगणना किया जाएगा।

‘बंगाल में अब तक का शांतिपूर्ण चुनाव’

पहले फेज की वोटिंग खत्म होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉफ्रेंस में कहा था कि यह पश्चिम बंगाल में अभी तक का सबसे शांतिपूर्ण चुनाव है। जहां, किसी भी तरह की कोई हिंसा नहीं हुई। अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने अभूतपूर्व उत्साह और जोश के साथ-साथ परिवर्तन के लिए मतदान किया है। मैं चुनाव आयोग, CAPF, चुनाव आयोग के मदद में लगा पूरा सिस्टम और बंगाल पुलिस को बहुत-बहुत अभिनंदन देना चाहता हूं, क्यों बहुत लंबे अरसे बाद बंगाल के चुनाव में एक भी मौत नहीं हुई, ऐसा पहली बार चुनाव हुआ है।

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बंगाल में सबसे अधिक राजनीतिक हत्या

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में होने वाली राजनीतिक हत्याओं में सबसे अधिक दर पश्चिम बंगाल में रही है। इसी चुनावी माहौले के बीच आइए विस्तार से जानते हैं कि बंगाल में कब और किस चुनाव में कितनी हिंसा और कितने लोगों की मौत हुई।

2024 लोकसभा चुनाव में 6-10 लोगों की मौत

2026 विधानसभा चुनाव से पहले 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा को रोकने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 900 से ज्यादा कंपनियों की तैनाती की गई थी। इसी वजह से 2023 के पंचायत चुनावों में बड़े पैमाने पर हुई मौतों को रोकने में मदद मिली। राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने 6 से 10 मौतों, 100 से ज्यादा हमले और कई जगहों पर EVM में तोड़फोड़ की कई घटनाओं को रिपोर्ट किया है।

2023 बंगाल पंचायत चुनाव में भारी हिंसा

साल 2023 में बंगाल में पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई थी। इस चुनाव का पहचान भारी संख्या में हुई मौतों से होती है, जिनकी शुरुआत नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही हो गई थी और जो वोटों की गिनती पूरी होने तक जारी रहीं। इन चुनावों में लगभग 45 से 55 लोगों की मौत की खबरें सामने आईं, जिनमें से 12 से 18 लोगों की जान तो मतदान के दिन ही चली गई थी।

2023 पंचायत चुनाव में हुई हिंसा के दौरान की तस्वीर, (सोर्स- सोशल मीडिया

2021 में टीएमसी की जीत की हैट्रिक

साल 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के साथ जोरदार मुकाबले के बाद तृणमूल कांग्रेस तीसरी बार सत्ता में वापस आई। ‘कॉल ऑफ जस्टिस’ की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान हिंसा की कम से कम 1,300 घटनाएं हुईं, 17 लोगों की मौत हुई और 7,000 छेड़छाड़ के मामले सामने आए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि 2019 और 2021 के बीच बंगाल में 130 से ज्यादा बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद चुनाव आयोग जैसे केंद्रीय निकायों ने इसकी जांच शुरू कर दी, और कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को बलात्कार और हत्या जैसे सबसे गंभीर अपराधों की जांच करने का निर्देश दिया।

2019 लोकसभा चुनाव में 12-15 लोगों की मौत

2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के अंदर भारतीय जनता पार्टी एक प्रमुख ताकत बनकर उभरी। उत्तरी बंगाल और कोलकाता के पास बैरकपुर में बड़े पैमाने पर राजनीतिक झड़पों की खबरें दर्ज की गई। सात चरणों में हुए इस चुनाव के दौरान कम से कम 12 से 15 लोगों की मौत हुई और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए।

2023 पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा में घायल लोगों की तस्वीर, (सोर्स- सोशल मीडिया)

2018 बंगाल पंचायत चुनाव सबसे हिंसक

2018 में बंगाल में हुए स्थानीय चुनाव को बीते 20 सालों का सबसे हिंसक चुनाव के रूप में देखा जाता है। चुनाव से पहले और चुनाव के दिन हुई हिंसा में कुल 75 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से 13 मौतें चुनाव के दिन हुईं। इन चुनावों में अलग-अलग जिलों में देसी बमों से हमले और बूथ पर कब्जे की घटनाएं देखने को मिलीं। इस चुनाव में 34 प्रतिशत सीटें बिना मुकाबले के ही तय हो गईं, जिनमें से ज्यादातर सीटें TMC ने जीतीं।

2016 विधानसभा चुनाव में 8-12 लोगों की मौत

बंगाल के पोलिंग बूथों पर केंद्रीय बलों की भारी तैनाती से यह सुनिश्चित हुआ कि हिंसा काबू में रहे, लेकिन चुनाव के बाद हिंसक घटनाओं में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। इस चुनाव के दौरान 8-12 लोगों की मौत की खबरें आईं, वहीं बड़े पैमाने पर लोगों के विस्थापन और आगजनी के मामले भी दर्ज किए गए। देसी बमों और आपसी झड़पों में सैकड़ों लोग घायल हुए।

2014 लोकसभा चुनाव में 7-16 लोगों की मौत

2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान बंगाल में हिंसा के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए, जिनमें 7-16 लोगों की मौत हुई और 1,298 राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता घायल हुए। चुनाव आयोग ने दर्ज किया कि पूरे भारत में चुनावी हिंसा में घायल हुए सभी 1,354 दर्शक (आम नागरिक, जो किसी पार्टी से जुड़े नहीं थे) बंगाल के ही थे।

2013 के पंचायत चुनाव में 20-30 लोगों की मौत

5 चरणों में केंद्रीय बलों की तैनाती के बावजूद, मरने वालों की अनौपचारिक संख्या 20 से 30 बताई गई। इस के साथ ही सैकड़ों मामले शारीरिक हमले के भी सामने आए। मतदान के दिन ही कम से कम 17 लोगों की मौत दर्ज की गई। इस चुनाव की एक और खास बात यह थी कि इसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती को लेकर राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच एक लंबी कानूनी लड़ाई चली थी।

2011 विधानसभा चुनाव में TMC का उदय

2011 के चुनाव में ममता बनर्जी ने आखिरकार 34 साल के वामपंथी शासन को खत्म कर दिया, वहीं चुनावों में हिंसा का सिलसिला पहले की तरह ही जारी रहा। कम से कम 17-25 लोगों की मौतें हुईं, और साथ ही यौन उत्पीड़न तथा डराने-धमकाने के कई मामले भी सामने आए। CPM नेताओं के अनुसार, मई 2011 से जुलाई 2016 के बीच 183 वामपंथी कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई थी।

2009 लोकसभा चुनाव में TMC-कांग्रेस का संघर्ष

2009 लोकसभा चुनाव के दौरान जंगलमहल इलाके में CPM, TMC-कांग्रेस कार्यकर्ताओं और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिला। मार्च और मई के बीच चुनाव प्रचार के दौरान कम से कम 15 लोगों की मौत की खबरें आईं, लेकिन चुनाव के बाद हुई हिंसा इतनी बढ़ गई कि वह चौंकाने वाले स्तर तक पहुंच चुकी थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 16 मई 2009 के बाद हुई राजनीतिक हत्याओं का आंकड़ा 150 के पार पहुंच गया था। लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बोस ने ‘द हिंदू’ को 269 समर्थकों की एक सूची की पुष्टि की थी, जिनकी हत्या 2009 के लोकसभा चुनावों से लेकर 2010 के मध्य तक के समय में हुई थी।

2008 पंचायत चुनाव में 45 मौत

साल 2028 में बंगाल में हुए पंचायत चुनाव में लेफ्ट और टीएमसी के बीच खूब झड़प हुई थी। नंदीग्राम और सिंगुर में हुई भारी झड़पों ने बड़े राजनीतिक बदलावों का संकेत दिया। 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 14 लोगों की जान चली गई थी, और 2008 के चुनावों के बाद मौतों की अनौपचारिक संख्या लगभग 45 बताई गई थी। हालांकि, सिंगुर आंदोलन में मौतों का कोई पुख्ता आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

यह भी पढ़ें: एग्जिट पोल में पूर्ण बहुमत, फिर भी मतगणना से पहले क्यों बढ़ी BJP की टेंशन? सामने आया ये चौकाने वाला आंकड़ा

2006 विधानसभा चुनाव में 5-6 लोगों की हत्या

बंगाल में 2006 हुए विधानसभा चुनाव में वामपंथी सरकार 292 में से 235 सीटों पर बड़ी जीत के सत्ता में वापस आई थी। आंकड़े बताते हैं कि यह चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा। हालांकि TMC और CPM के कार्यकर्ताओं के बीच छिटपुट झड़पें हुई थीं। इस चुनाव के दौरान हुई मौतों का कोई पुख्ता डेटा तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 5 से 6 लोगों की मौत हुई थी।

West bengal election related violence in 20 years tmc bjp left congress

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Published On: May 03, 2026 | 08:37 PM

Topics:  

  • Assembly Election 2026
  • West Bengal
  • West Bengal Assembly Election

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