ममता बनर्जी का तख्तापलट! स्पीकर से मिलने पहुंचे TMC के 60 से अधिक बागी विधायक, बोले- दीदी के खिलाफ नहीं पर…
TMC Political Crisis: ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) दो भाग में बंट सकती है। पार्टी से निकाले गए संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी से 50 अधिक विधायकों को लेकर स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं।
- Written By: अक्षय साहू
पश्चिम बंगाल में टीएमसी विधायक विद्रोह (सोर्स- सोशल मीडिया)
TMC MLA Revolt West Bengal: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में छिड़ी सियासी जंग ने एक बड़ा मोड़ ले लिया है। बुधवार को टीएमसी के 80 में से 60 विधायक कोलकाता में विधानसभा पहुंचे। माना जा रहा है कि यह विधायक स्पीकर से मिलकर खुद को असली TMC घोषित कर सकते हैं। इन बागी विधायकों का नेतृत्व पार्टी से निकाले गए संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं।
माना जा रहा है कि जल्द ही टीएमसी दो गुटों में बंट सकती है। जिसमें एक गुट का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी कर सकते हैं। जबकि दूसरे गुट की कमान संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी संभाल सकते हैं।
हम ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं: रिजू दत्ता
टीएमसी के बागी नेता और प्रवक्ता रिजू दत्ता ने स्पीकर से मिलने और ममता बनर्जी का साथ छोड़ने को लेकर कहा कि, कोई भी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है। हमने पार्टी को बचाने के लिए यह कदम उठाया है। वहीं बागी विधायकों में से एक मुस्तफिजुर रहमान ने दावा किया कि हमारे पास 59 विधायकों का समथर्न है औ हम ही असली टीएमसी की नेतृत्व कर रहे हैं।
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स्पीकर से क्या मांग कर सकते हैं बागी विधायक
माना जा रहा है कि बागी विधायक स्पीकर से मिलने के बाद उनके सामने तीन बड़ी मांग रख सकते हैं। पहला- हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। दूसरे हमारे तिहाई बहुमत है, इसलिए चुनाव चिह्न हमारा होना चाहिए। तीसरा- विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी को बनाया जाए, न कि शोभनदेव को।
क्यों पड़ी टीएमसी में फूट
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के नेतृत्व में लगातार तीन बार चुनाव जीतकर सरकार बनाने में कामयाब रही है। एक लंबे समय तक ममता बनर्जी मतलब ही टीएमसी था, लेकिन हाल ही विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार ने स्पष्ट कर दिया की पार्टी में सब कुछ सही नहीं चल रहा है।
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कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी में ममता से अधिक अभिषेक का दखल बढ़ा गया था। साथ ही अभिषेक अपने हिसाब से फैसले ले रहे थे। जो चुनाव में हार का प्रमुख कारण बना। नेताओं ने कहा कि अभिषेक केवल अपने आसपास के लोगों को सुनते थे और उनसे मिलना बहुत मुश्किल हो गया था। उन्होंने ममता बनर्जी को इस बारे में अवगत कराया था, लेकिन उन्होंने कोई कदम उठाने की जगह आंख मूंद ली।
