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Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजते ही प्रशासनिक फेरबदल को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सोमवार को संसद के उच्च सदन, राज्यसभा में उस वक्त भारी हंगामा देखने को मिला जब टीएमसी के सदस्यों ने चुनाव आयोग की कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
आयोग द्वारा राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पदों से हटाए जाने को टीएमसी ने केंद्र सरकार की ‘मनमानी’ और ‘लोकतंत्र पर हमला’ करार दिया है।
सोमवार को जैसे ही राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही शुरू हुई, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने शीर्ष अधिकारियों के तबादलों का मुद्दा गरमा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव की तारीखों के ऐलान के तुरंत बाद देर रात इस तरह की कार्रवाई करना निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने जैसा है।
टीएमसी सांसदों का कहना है कि यह कदम राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अस्थिर करने के लिए उठाया गया है। विरोध स्वरूप, टीएमसी के सभी सदस्यों ने दिन भर के लिए सदन से वॉकआउट कर दिया।
टीएमसी के हंगामे और वॉकआउट पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है और उसके द्वारा लिए गए निर्णयों में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती। रीजीजू ने टीएमसी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये पार्टियां बार-बार संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करती हैं, जबकि संविधान ने आयोग को पूर्ण अधिकार दिए हैं।, उन्होंने इस मुद्दे को सदन में उठाने को समय का दुरुपयोग बताया।
निर्वाचन आयोग ने रविवार रात ही ममता बनर्जी सरकार को एक पत्र भेजकर बड़े बदलावों के निर्देश दिए थे।, आयोग ने 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नरियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। वहीं, 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों की प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हटाए गए अधिकारियों- नंदिनी चक्रवर्ती और जगदीश प्रसाद मीणा- को चुनाव संपन्न होने तक किसी भी चुनाव संबंधी कार्य में शामिल नहीं किया जाएगा।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रशासनिक फेरबदल राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभ्यास को लेकर आयोग की पिछली शिकायतों और तैयारियों की समीक्षा के बाद किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम चुनाव के दौरान पूर्ण प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। बंगाल में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा है, जहां 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोट डाले जाएंगे और 4 मई को चुनाव के नतीजे घोषित होंगे।