

Sushmita Dev Interview: तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाली राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने एक इंटरव्यू में टीएमसी, कांग्रेस और भाजपा पर खुलकर अपनी बात रखी है। पांच साल तक टीएमसी में रहीं सुष्मित देव ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में पुरानी पार्टियों से मोहभंग, आरएसएस, कांग्रेस और टीएमसी पर विस्तार से बात की।
देव ने छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से शुरुआत करने वाली देव 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल गईं। इस पर उन्होंने बताया कि कांग्रेस से तृणमूल में शामिल होना कोई विचारधारा का बदलाव नहीं था। ममता बनर्जी भी कांग्रेस छोड़कर खुद की पार्टी का गठन किया।
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल और देश में टीएमसी का वोट शेयर किसी विचारधारा पर आधारित नहीं है। यह एक नेता-केंद्रित है। वहीं, कांग्रेस के वोट शेयर का आधार विचारधारा है या भाजपा को नापसंद करने पर लोग कांग्रेस को वोट देते हैं, लेकिन बीजेपी का वोट शेयर पूरी तरह से विचारधारा पर आधारित है। देव ने बताया कि बीजेपी के पास जब दो सांसद थे या जब एक भी सांसद नहीं थे और जब आज वो सत्ता में हैं, इस दौरान कभी भी उन्होंने अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया है।
कांग्रेस में लोकतंत्र की बात पर वो कहती हैं, कि पार्टी हर चुनाव के बाद कई समीक्षा बैठक करती है, इससे उसका स्वरूप लोकतांत्रिक लगता जरूर है, लेकिन बात जब उसे लागू करने की आती है, तो पार्टी आम असहमति दिखने लगती है।
सुष्मिता ने बताया कि टीएमसी में कार्यकर्ताओं की चर्चा के लिए कोई मंच नहीं है। वहां सारी शक्ति एक ही व्यक्ति के हाथ में है। उन्होंने ही पार्टी बनाई,उसे चलाया और पार्टी की पूरी बागडोर उन्हों के हाथ में है, लेकिन भाजपा में सभी सांसदों का एक पालक मंत्री होता है। सांसद उस पालक मंत्री से अपने राज्य की समस्याओं पर खुलकर बात कर सकता है।
इसके अलावा, पार्टी के पास संगठन है। पार्टी में सीधे प्रधानमंत्री मोदी या गृह मंत्री अमित से भी संपर्क किया जा सकता है और अगर कोई काम नहीं करता तो संघ परिवार है जो जमीनी हकीकत से वाकिफ रहता है।