लोकसभा में पेश हुए रैगिंग के आंकड़े; UP में सबसे अधिक 135 शिकायतें, पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर

Uttar Pradesh Ragging Cases 2026: शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में बताया कि 22 जुलाई 2026 तक देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग के मामले सामने आए हैं, जिसमें यूपी सबसे आगे है।
Ragging statistics presented in Lok Sabha; Uttar Pradesh has the highest number of complaints at 135, West Bengal is second
उत्तर प्रदेश रैगिंग केस (सोर्स-आईएएनएस)
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UP UGC Anti Ragging Rules: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में ताजा आंकड़े पेश किए हैं। शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने बताया कि 22 जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश में रैगिंग की सबसे अधिक 135 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जबकि पश्चिम बंगाल 75 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद मध्य प्रदेश (63), महाराष्ट्र (53) और बि

हार (50) का स्थान है। मंत्री ने बताया कि राजस्थान में 44, कर्नाटक में 41, ओडिशा में 36 और दिल्ली में 27 शिकायतें दर्ज हुई हैं।

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने रैगिंग विरोधी नियमों का पालन नहीं करने पर 18 मेडिकल कॉलेजों सहित 107 उच्च शिक्षण संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। इनमें छात्रों और अभिभावकों से अनिवार्य एंटी-रैगिंग वचन पत्र नहीं लेने और अनुपालन रिपोर्ट जमा नहीं करने जैसी कमियां पाई गईं। सरकार का कहना है कि यूजीसी का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ संस्थानों में सुधार सुनिश्चित करना है, ताकि परिसर में छात्रों की सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण कायम रखा जा सके।

यूपी में सबसे अधिक रैगिंग शिकायतें

शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने 22 जुलाई तक के अपडेट आंकड़े साझा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में रैगिंग की सबसे अधिक 135 शिकायतें दर्ज की गई हैं, वहीं मध्य प्रदेश (63), महाराष्ट्र (53) और बिहार (50) रैगिंग की शिकायतों के मामले में अगले तीन राज्य हैं। सयानी घोष के एक प्रश्न के उत्तर में राज्य मंत्री ने बताया कि इस वर्ष अब तक राजस्थान में रैगिंग की 44, कर्नाटक में 41, ओडिशा में 36 और दिल्ली में 27 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

107 संस्थानों को यूजीसी का नोटिस

राज्य मंत्री ने कहा कि 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एंटी-रैगिंग विनियम, 2009 के अनिवार्य प्रावधानों का अनुपालन न करने के लिए 18 मेडिकल कॉलेजों सहित 107 उच्च शिक्षा संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए। उन्होंने कहा कि इन नोटिसों में छात्रों और अभिभावकों/संरक्षकों से रैगिंग विरोधी वचन प्राप्त करने में विफलता, और बार-बार सलाह और अनुवर्ती कार्रवाई के बावजूद संस्थागत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत न करने जैसी कमियों को उजागर किया गया है।

रैगिंग रोकने के लिए सख्त नियम

मजूमदार ने कहा कि नियामक दृष्टिकोण सुधारात्मक और निवारक बना हुआ है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि संस्थान कमियों को दूर करें और रैगिंग विरोधी उपायों का सख्ती से पालन करें, जिससे छात्र कल्याण और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की समस्या को रोकने के लिए 2016 में मौजूदा नियमों में तीसरा संशोधन किया। रैगिंग की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है।

UGC साल में दो बार देती है सलाह

उन्होंने आगे कहा कि छात्रों में बढ़ी हुई जागरूकता स्वयं रिपोर्टिंग और निवारण को प्रोत्साहित करने में नियामक ढांचे की प्रभावशीलता को दर्शाती है। राज्य मंत्री ने कहा कि रैगिंग की रोकथाम के लिए जागरूकता, रिपोर्टिंग और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने हेतु यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों को प्रतिवर्ष दो बार सलाह जारी की जाती है।

हेल्पलाइन और ऑनलाइन शपथ अनिवार्य

उन्होंने आगे कहा कि नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए रैगिंग विरोधी उपाय किए गए हैं, जिनमें चौबीसों घंटे राष्ट्रीय रैगिंग विरोधी हेल्पलाइन की स्थापना, रैगिंग विरोधी कार्यशालाएं और सेमिनार, संस्थानों के प्रॉस्पेक्टस में रैगिंग के गंभीर परिणामों का अनिवार्य समावेश, प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में छात्रों और अभिभावकों द्वारा अनिवार्य ऑनलाइन वचन पत्र और संस्थानों में प्रमुख स्थानों पर रैगिंग विरोधी पोस्टर प्रदर्शित करना शामिल है।

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