सिर्फ 10 मिनट में पार कर ली सरहद! घुसपैठियों ने खुद खोली पोल, बताया कैसे भारत में बनाई अवैध पहचान
West Bengal में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ जारी सख्त कार्रवाई के बीच, बड़ी संख्या में बांग्लादेशी वापस अपने देश भाग रहे हैं। भारत छोड़कर जा रहे इन लोगों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Bangladeshi Infiltration West Bengal: बंगाल से भागने वाले घुसपैठियों ने बताया कि कैसे बिचौलियों की मदद से उन्होंने महज 10 मिनट में सीमा पार की और राजनीतिक संरक्षण में आधार-वोटर कार्ड जैसे दस्तावेज बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया है।
पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों के खिलाफ सरकार के कड़े रुख और होल्डिंग सेंटर्स बनाए जाने की खबरों के बाद सीमावर्ती इलाकों में भारी अफरा-तफरी का माहौल है। नॉर्थ 24 परगना के हाकिमपुर चेक पोस्ट और अन्य ट्रांजिट टर्मिनलों पर सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिक जमा हैं, जो वापस बांग्लादेश जाने की फिराक में हैं। इनमें से कई लोग दशकों से, और कुछ तो अपना पूरा जीवन भारत में बिताने के बाद अब अपनी घुसपैठ की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।
बिचौलियों का खेल: पेट्रोलिंग गैप और 10 मिनट का रास्ता
सीमा पार करने के संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए घुसपैठियों ने बताया कि यह पूरा खेल बिचौलियों के जरिए चलता है। कुश्तिया जिले के एक बढ़ई ने बताया कि उसने एक दलाल को 7,000 से 8,000 रुपये दिए थे। ये दलाल रात के अंधेरे में बीएसएफ के जवानों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
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BJP की सरकार आते ही बांग्लादेशी वापिस जा रहे हैं …. पर इनको अंदर किसने आने दिया था ? क्या कभी भी राहुल गाँधी, ममता बनर्जी या अखिलेश यादव ने अवैध घुसपैठियों के ख़िलाफ़ कुछ बोला ? कभी नहीं ! क्यों ? pic.twitter.com/elfDr7DL1L — Major Surendra Poonia (@MajorPoonia) May 27, 2026
जैसे ही सुरक्षा घेरे में कोई ‘गैप’ या ढील नजर आती है, वे महज 10 मिनट के भीतर घुसपैठियों के समूह को सीमा पार करा देते हैं। कुछ मामलों में एजेंटों को 20,000 रुपये तक का भुगतान किया गया, जिन्होंने “मिलिट्री की मौजूदगी” के बावजूद उन्हें भारत में प्रवेश दिलाया।
सरकारी दस्तावेजों का चल रहा सिंडिकेट
भारत में प्रवेश करने के बाद इन अवैध प्रवासियों को यहीं बसाने और उन्हें वैध दिखाने के लिए एक पूरा इकोसिस्टम काम करता है। कुछ प्रवासियों ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने उनके पहचान पत्र बनवाने में मदद की।
एक महिला ने खुलासा किया कि ममता बनर्जी की सरकार के दौरान उसके वोटर कार्ड और राशन कार्ड बनवाए गए थे और वह पिछले दो-तीन वर्षों से ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का लाभ भी ले रही थी। एक अन्य घुसपैठिये ने स्वीकार किया कि उसने भारत में मतदान भी किया है और उसकी पत्नी को सरकारी योजनाओं के जरिए सीधे नकद हस्तांतरण मिलता था।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपनाया कड़ा रुख
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ कहा है कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को न तो शरण दी जाएगी और न ही उन्हें सीधे अदालत में पेश किया जाएगा, बल्कि उन्हें सीधे सीमा पर बीएसएफ को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं से 30 लाख अपात्र लाभार्थियों, जिनमें गैर-भारतीय भी शामिल थे, को हटा दिया गया है।
अमित शाह ने क्या कहा?
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वैच्छिक रूप से बांग्लादेश लौट रहे लोगों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चूंकि घुसपैठिये खुद वापस जा रहे हैं, इसलिए सरकार उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी को बीएसएफ को अतिरिक्त जमीन सौंपने के लिए बधाई भी दी ताकि सीमा सुरक्षा को और पुख्ता किया जा सके।
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भारत-बांगलादेश की सीमा के बारे में भी जान लीजिए
वर्तमान में भारत-बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा का लगभग 79% हिस्सा (3,232 किमी) घेराबंदी के दायरे में आ चुका है। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने भी बताया कि उनके राज्य में सीमा पर बाड़ लगाने का काम अंतिम चरण में है और केवल 40-45 किलोमीटर का हिस्सा शेष है। अधिकारियों का कहना है कि मानव तस्कर सीमा के नदी तटीय क्षेत्रों और घनी आबादी वाले लूपहोल्स का फायदा उठाकर घुसपैठ कराते हैं।
