बंगाल में शिक्षकों पर संकट, हाईकोर्ट ने दिया तत्काल वेतन रोकने का आदेश, ये है पूरा मामला
Calcutta High Court News: कोलकाता हाईकोर्ट ने 313 शिक्षकों का वेतन रोकने का आदेश दिया है। कई बार भर्ती के मामले में राज्य सरकार के जवाब न देने पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। इससे शिक्षकों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
- Written By: यतीश श्रीवास्तव
कोलकाता हाईकोर्ट (सौजन्य: सोशल मीडिया)
कोलकाता: कोलकाता हाईकोर्ट के एक आदेश ने शिक्षकों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। पश्चिम बंगाल में हाईकोर्ट ने 313 शिक्षकों के वेतन तत्काल रोके जाने का आदेश जारी किया है। राज्य सरकार की ओर से 25 हजार शिक्षक भर्ती मामले पर अभी संकट चल ही रहा है, उस पर कोर्ट ने एक अन्य मामले में 313 शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दे दिया है। इससे शिक्षकोें के सामने संकट खड़ा हो गया है।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश विश्वजीत बसु की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि संबंधित शिक्षकों का वेतन रोकने के साथ सरकार 72 घंटे के अंदर सभी जानकारी कोर्ट को उपलब्ध कराए। पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षकों की भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।
राज्य सरकार से भर्ती को लेकर मांगी गई थी जानकारी
पश्चिम बंगाल सरकार से न्यायाधीश ने पहले भी शिक्षक भर्ती को लेकर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन सरकार ने लापरवाही दिखाते हुए कोई सूचना नहीं प्रस्तुत की थी। मामले की जांच अभी सीआईडी के अधीन चल रही है। सोमवार को सभी दस्तावेज की जांच के बाद गड़बड़ी पाए जाने और सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी न देने पर हाईकोर्ट ने शिक्षकों का वेतन रोकने और 72 घंटे भर्ती संबंधी सभी जानकारी अदालत को उपलब्ध कराने का आदेश राज्य सरकार को दिया है।
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कही ये बात
राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नेताजी इंडोर स्टेडियम में नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों और गैर शिक्षण कर्मचारियों से मुलाकात की और कहा कि प्रभावित शिक्षकों के लिए दो महीने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी योग्य उम्मीदवार की नौकरी नहीं जाने दी जाएगी। वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इसमें शिक्षक भर्ती मामले में पिछले सप्ताह 25,000 नौकरियों को रद्द करने के आदेश में संशोधन की मांग की गई। बोर्ड की तरफ से अधिवक्ता ने मांग की है कि योग्य उम्मीदवारों को आगामी शैक्षिक वर्ष के अंत तक या नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने तक ड्यूटी पर बने रहने की अनुमति दी जाए, हालांकि कोर्ट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
