

Railway Ticket Clerk : रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर पर यात्री और महिला टिकट क्लर्क के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला कैश से टिकट खरीदने और छुट्टे पैसे वापस लेने से जुड़ा है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर इसे लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। वायरल वीडियो में महिला क्लर्क यात्री से बहस नहीं करने की बात कहती नजर आती हैं और बताती हैं कि ज्यादातर लोग अब ऑनलाइन पेमेंट कर रहे हैं।
इसके बाद यात्री 130 रुपये के टिकट के लिए 150 रुपये देने की कोशिश करता है, लेकिन क्लर्क अतिरिक्त 20 रुपये लेकर टिकट देने से इनकार कर देती हैं। उनका कहना है कि उनके पास लौटाने के लिए छुट्टे पैसे नहीं हैं। मामले को लेकर कुछ लोग यात्री के पक्ष में हैं तो कुछ का कहना है कि सही रकम न होने पर टिकट क्लर्क के लिए परेशानी होना स्वाभाविक है।
वीडियो में आगे यात्री कैश देकर टिकट लेने की कोशिश करता दिखाई देता है। बताया जा रहा है कि उसके पास ऑनलाइन पेमेंट करने का विकल्प नहीं था और वह 200 रुपये देकर टिकट की रकम काटने के बाद बाकी पैसे वापस मांग रहा था। महिला क्लर्क ने 130 रुपये के टिकट के बदले 150 रुपये लेने से मना कर दिया।
इसके बाद 50 रुपये का प्लेटफॉर्म टिकट लेने की बात भी सामने आती है, लेकिन छुट्टे पैसे की समस्या के कारण वह लेन-देन नहीं हो पाता। इसी दौरान दोनों के बीच बहस होती दिखाई देती है। वीडियो को X पर जेम ऑफ रेलवे (@GemsOfRailway) सहित अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स से शेयर किया गया है। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि अगर यात्री कैश से भुगतान करना चाहता है तो एक सामान्य लेन-देन को इतना मुश्किल क्यों बनाया जा रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों का कहना है कि टिकट काउंटर पर कैश भुगतान की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए और यात्रियों को केवल UPI पर निर्भर नहीं किया जा सकता। वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि अगर क्लर्क के पास पर्याप्त छुट्टे पैसे नहीं हैं तो वह 150 रुपये लेकर 20 रुपये वापस नहीं कर सकती।
कई लोगों ने महिला क्लर्क के बात करने के तरीके पर भी सवाल उठाया और कहा कि समस्या समझाने का तरीका ज्यादा शालीन होना चाहिए था। दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने बदलते दौर में UPI और डिजिटल पेमेंट को सुविधाजनक विकल्प बताया। फिलहाल यह वायरल वीडियो कैश पेमेंट बनाम डिजिटल पेमेंट की बहस के साथ-साथ सार्वजनिक सेवा में कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।