MP की अफसरशाही में दलालों का दबदबा, करप्शन की काली सच्चाई सामने आई! स्पीकर पर अफसरों की 'रेट लिस्ट'

MP के मुरैना जिसे से हाल ही में वायरल हुआ भ्रष्टाचार का लाइव खेला इस समय पूरे देश में सुर्खियों बटोर रहा है। पीड़ित ने इसका खुलासा भरी सभा में जनप्रतिनिधि के सामने ही करके महकमें में हडकंप मचा दिया।
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मुरैना में करप्शन की काली सच्चाई का जनप्रतिनिधि के सामने लाइव खुलासा (फोटो- सोशल मीडिया)
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MP Morena Municipal Corruption Viral Video: मध्य प्रदेश के मुरैना में हाल ही में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया। नगर निगम में चल रही जनसुनवाई के दौरान एक पीड़ित ने ऐसा खुलासा किया कि वहां मौजूद मेयर और बाकी लोग सन्न रह गए। भवन निर्माण की अनुमति के लिए भटक रहे एक युवक ने सबके सामने अपनी बात साबित करने के लिए फोन मिलाया और स्पीकर ऑन कर दिया। इसके बाद फोन पर जो बातें हुईं, उसने सरकारी दफ्तरों में चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी।

यह पूरा मामला 11 नवंबर का है जब पंकज राठौर नाम का युवक अपनी समस्या लेकर मेयर शारदा सोलंकी के पास पहुंचा था। उसका आरोप था कि मकान बनाने की परमिशन के लिए उससे लगातार रिश्वत मांगी जा रही है। उसने भरी सभा में उस कथित दलाल को कॉल कर दिया। फोन पर बात करते हुए दलाल ने बेखौफ होकर बताया कि फाइल पास कराने के लिए ईई शर्मा से लेकर फोटो खींचने वाले तक को कितने पैसे देने होंगे। यह सब वहां मौजूद लोगों ने लाइव सुना।

फोन पर सुनाई गई रिश्वत की पूरी रेट लिस्ट

कॉल स्पीकर पर होते ही दलाल ने बेझिझक पैसों का बंटवारा समझाना शुरू कर दिया। उसने साफ कहा कि ईई शर्मा के लिए 10 हजार रुपये लगेंगे। इसके अलावा फोटो खींचने वाले भानु तोमर के लिए 4 हजार रुपये और अजय परिहार के नाम पर 1 हजार रुपये की मांग की गई। दलाल ने अपने खुद के लिए 3 हजार रुपये मांगे और कुल मिलाकर 15 से 18 हजार रुपये का खर्चा बताया। सामने वाले व्यक्ति ने पंकज से कहा कि फाइल पीडीएफ में भेज दो और पैसे फोन पे कर दो, जिसके बाद उसका काम हो जाएगा।

मेयर के आदेश के बाद मचा हड़कंप

इस लाइव खुलासे के बाद मेयर शारदा सोलंकी ने तुरंत जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। नगर निगम कमिश्नर सतेंद्र सिंह धाकरे ने बताया कि जिन कर्मचारियों के नाम बातचीत में आए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। हालांकि, कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति से फोन पर बात हुई वह निगम का कर्मचारी नहीं है और अनुमति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। फिलहाल इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद से विभाग में खलबली मची हुई है और जांच जारी है।

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