ग्वालियर स्टेशन पर कथित चोर की बेरहमी से पिटाई, पत्नी-बच्चे के सामने मारे गए लात-घूंसे; वीडियो पर छिड़ी बहस

Mob Beating Thief : ग्वालियर रेलवे स्टेशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कथित चोरी के आरोप में पकड़े गए एक शख्स की भीड़ बेरहमी से पिटाई करती दिखाई दे रही है।
A viral video of an alleged thief being beaten by a mob at Gwalior railway station has sparked a debate over mob justice.
वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Crowd Violence Viral Video : सोशल मीडिया पर ग्वालियर रेलवे स्टेशन का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर चोरी के आरोप में पकड़े गए एक व्यक्ति की भीड़ द्वारा पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। वायरल दावे के अनुसार, शख्स अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ स्टेशन पर मौजूद था।

आरोप है कि उसने एक महिला के सोने के झुमके और अन्य कीमती सामान चुराने की कोशिश की, जिसके बाद लोगों ने उसे पकड़ लिया। हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वायरल वीडियो के आधार पर किए जा रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

ग्वालियर स्टेशन पर चोर की बेरहमी से पिटाई

वीडियो में दिखाई देता है कि भीड़ कथित आरोपी को घेरकर मारपीट करती है। कुछ लोग उसे थप्पड़ और घूंसे मारते हैं, जबकि कुछ लोग उसके चेहरे पर लात मारते हुए भी नजर आते हैं। इसी दौरान उसकी पत्नी और छोटा बच्चा भी मौके पर पहुंच जाते हैं।

वीडियो में शख्स अपने बच्चे को गोद में उठाकर खुद को बचाने की कोशिश करता दिखाई देता है, लेकिन भीड़ का गुस्सा शांत नहीं होता। सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के मुताबिक, बाद में मौजूद लोगों ने आरोपी को GRP और RPF के हवाले कर दिया। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

कानून हाथ में लेने को लेकर बहस शुरू

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ यूजर्स का कहना है कि चोरी करना अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कानून अपने हाथ में लेना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने भीड़ द्वारा की गई मारपीट को अत्यधिक हिंसक बताते हुए सवाल उठाए कि क्या किसी आरोपी को इस तरह पीटना सही है।

वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने भीड़ की कार्रवाई का समर्थन भी किया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी अपराध के संदेह में पकड़े गए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करना पुलिस और न्याय व्यवस्था का काम है। ऐसे मामलों में भीड़ द्वारा हिंसा करना खुद एक अलग कानूनी अपराध बन सकता है।

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