16वें फ्लोर की जिंदगी या ‘सोने की जेल’? वायरल वीडियो ने खोल दी फ्लैट लाइफ की सच्चाई
Apartment Life in Metro Cities : सोशल मीडिया पर वायरल एक रील में 16वें फ्लोर पर रहने वाला युवक बताता है कि उसकी मां दो-दो महीने तक नीचे नहीं उतर पाती। मेट्रो सिटीज की अपार्टमेंट लाइफ पर बहस छिड़ी।
- Written By: हितेश तिवारी
वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
High Rise Living Issues : महानगरों में अपार्टमेंट के अंदर फ्लैट लेना आजकल स्टेटस और सुविधा की निशानी माना जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इस चमक-दमक के पीछे की हकीकत दिखा दी है।
वीडियो में एक युवक बताता है कि वह 16वें फ्लोर पर रहता है और उसकी मां धूप लेने के लिए भी अक्सर नीचे नहीं आ पाती। उसने कहा कि उसकी मम्मी दो-तीन महीने में सिर्फ एक बार ही नीचे आती हैं। यह सुनकर लोग हैरान रह गए और मेट्रो सिटी की लाइफस्टाइल पर सवाल उठने लगे।
अपार्टमेंट की लाइफस्टाइल अनकही सच्चाई
वीडियो में युवक कहता है कि आज उसकी मां करीब एक महीने बाद नीचे आई हैं और नीचे आकर उन्हें काफी रिलैक्स महसूस हो रहा है। वह फ्लैट्स को ‘कबूतरखाना’ तक कह देता है और लोगों को सलाह देता है कि घर खरीदने से पहले इन बातों पर जरूर ध्यान दें।
उसका कहना है कि जब घर में सीधी धूप नहीं आती, तो जिंदगी सीमित सी हो जाती है। खासकर दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में हाईराइज बिल्डिंग्स में रहने वालों की दिनचर्या अक्सर चार दीवारों तक सिमट जाती है।
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गांव की खुली हवा सबसे बेहतर
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @pariwarikmahaulblogs नाम के यूजर ने शेयर किया है। अब तक इसे लाखों लोग देख चुके हैं और हजारों लाइक्स मिल चुके हैं। कमेंट सेक्शन में कई लोगों ने लिखा कि गांव की खुली हवा इससे बेहतर है।
कुछ यूजर्स ने ऐसी इमारतों को ‘सोने की जेल’ बताया। यह वीडियो सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि महानगरों में तेजी से बदलती जीवनशैली की झलक भी दिखाता है।
