रूह कंपा देने वाला वीडियो! स्कूल जाने के लिए उफनती नदी पार करते मासूम, दांव पर लगी जिंदगी! देखें VIDEO
Uttarakhand Kosi River: उत्तराखंड के रामनगर से एक खौफनाक वीडियो वायरल हो रहा है, जहां मासूम बच्चे उफनती कोसी नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। पुल न होने से हर मानसून इनकी जिंदगी दांव पर लगती है।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
Uttarakhand Kosi River School Children Crossing: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र स्थित चुकुम गांव का एक दिल दहला देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में छोटे-छोटे स्कूली बच्चे उफनती और खतरनाक कोसी नदी के तेज बहाव के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते नजर आ रहे हैं। मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से इस करीब 500 की आबादी वाले गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है।
ग्रामीणों द्वारा बनाया जाने वाला अस्थायी लकड़ी का पुल बारिश में बह जाता है, जिससे बच्चों की शिक्षा और लोगों का जीवन संकट में पड़ जाता है। हालांकि प्रशासन ने तीन महीने का राशन और राफ्ट की व्यवस्था की है, लेकिन स्थानीय निवासी एक स्थायी और सुरक्षित पुल की मांग कर रहे हैं ताकि हर साल बच्चों को इस जानलेवा रास्ते से न गुजरना पड़े। यह वीडियो पहाड़ के कई तटीय इलाकों में सड़क और पुल जैसी भव्य इमारतों की कमी की ओर इशारा करता है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण अधिकारों को प्रभावित करता है
Uttarakhand Kosi River School Children Crossing: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र स्थित चुकुम गांव का एक दिल दहला देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में छोटे-छोटे स्कूली बच्चे उफनती और खतरनाक कोसी नदी के तेज बहाव के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते नजर आ रहे हैं। मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से इस करीब 500 की आबादी वाले गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है।
ग्रामीणों द्वारा बनाया जाने वाला अस्थायी लकड़ी का पुल बारिश में बह जाता है, जिससे बच्चों की शिक्षा और लोगों का जीवन संकट में पड़ जाता है। हालांकि प्रशासन ने तीन महीने का राशन और राफ्ट की व्यवस्था की है, लेकिन स्थानीय निवासी एक स्थायी और सुरक्षित पुल की मांग कर रहे हैं ताकि हर साल बच्चों को इस जानलेवा रास्ते से न गुजरना पड़े। यह वीडियो पहाड़ के कई तटीय इलाकों में सड़क और पुल जैसी भव्य इमारतों की कमी की ओर इशारा करता है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण अधिकारों को प्रभावित करता है
