19 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक! जानिए जान देने वाले महान नेताओं की कहानी, देखें VIDEO
Jantar Mantar protest: सोनम वांगचुक के 19वें दिन के अनशन के बीच जानिए भारत में ऐतिहासिक भूख हड़तालों की कहानी, जहाँ पोट्टी श्रीरामुलु और GD अग्रवाल जैसे नेताओं ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
India Hunger Strike History: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहा आमरण अनशन अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही है और उनका वजन भी काफी कम हो गया है। इस वीडियो में भारत के इतिहास में उपवास के जरिए किए गए उन महान बलिदानों को भी याद किया गया है जिन्होंने देश की राजनीति और दशा-दिशा को बदल दिया था। इनमें मुख्य रूप से पोट्टी श्रीरामुलु का जिक्र किया गया है, जिन्होंने अलग आंध्र प्रदेश राज्य की मांग के लिए 58 दिनों तक ऐतिहासिक उपवास रखा था, जिसके बाद 1953 में आंध्र प्रदेश का गठन हुआ।
इसके अलावा, गंगा नदी के संरक्षण और अविरल प्रवाह के लिए 111 दिनों का लंबा उपवास रखने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के सर्वोच्च बलिदान को भी रेखांकित किया गया है। वीडियो में यह बताया गया है कि भारत में भूख हड़ताल और उपवास की यह परंपरा महात्मा गांधी से भी पुरानी है, जिसे ‘तपस्या’ और ‘नैतिक दबाव’ का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। वर्तमान में सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को पूरे देश से भारी समर्थन मिल रहा है और लोग शिक्षा प्रणाली में सुधार जैसी उनकी प्रमुख मांगों के समर्थन में अपनी आवाज मुखर कर रहे हैं।
India Hunger Strike History: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहा आमरण अनशन अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही है और उनका वजन भी काफी कम हो गया है। इस वीडियो में भारत के इतिहास में उपवास के जरिए किए गए उन महान बलिदानों को भी याद किया गया है जिन्होंने देश की राजनीति और दशा-दिशा को बदल दिया था। इनमें मुख्य रूप से पोट्टी श्रीरामुलु का जिक्र किया गया है, जिन्होंने अलग आंध्र प्रदेश राज्य की मांग के लिए 58 दिनों तक ऐतिहासिक उपवास रखा था, जिसके बाद 1953 में आंध्र प्रदेश का गठन हुआ।
इसके अलावा, गंगा नदी के संरक्षण और अविरल प्रवाह के लिए 111 दिनों का लंबा उपवास रखने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के सर्वोच्च बलिदान को भी रेखांकित किया गया है। वीडियो में यह बताया गया है कि भारत में भूख हड़ताल और उपवास की यह परंपरा महात्मा गांधी से भी पुरानी है, जिसे ‘तपस्या’ और ‘नैतिक दबाव’ का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। वर्तमान में सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को पूरे देश से भारी समर्थन मिल रहा है और लोग शिक्षा प्रणाली में सुधार जैसी उनकी प्रमुख मांगों के समर्थन में अपनी आवाज मुखर कर रहे हैं।
