प्रसव के बाद 18 महिलाओं की मौत! क्या अस्पताल की लापरवाही छिपा रहे हैं स्वास्थ्य मंत्री? देखें VIDEO
Rajasthan Health Crisis News: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद 18 महिलाओं की मौत और स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के गैर-जिम्मेदाराना बयान से मचा हड़कंप। जानें पूरी खबर।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
Rajasthan Health Minister Gajendra Singh Statement: पिछले दो महीनों में राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव और गुर्दे की विफलता के कारण 18 महिलाओं की असामयिक मौत ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे गंभीर मामला भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल का सामने आया है, जहां कुछ ही दिनों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की जान चली गई।
इस गंभीर स्वास्थ्य संकट और ऑपरेशन थिएटर में जीवनरक्षक उपकरणों की भारी कमी के बावजूद, जब स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से इस पर सवाल किया गया, तो उनका असंवेदनशील रवैया और “ब्रेक के बाद” जैसी टिप्पणियां सोशल मीडिया पर भारी विवाद का कारण बन गईं,। हालांकि प्रारंभिक रक्त जांच रिपोर्ट सामान्य आई है और विशेषज्ञों को अभी तक इन मौतों का कोई एक स्पष्ट कारण नहीं मिला है, लेकिन अस्पतालों में अत्यधिक दबाव और संसाधनों के अभाव ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। राज्य सरकार ने मामले की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन बढ़ते मातृ मृत्यु आंकड़े जनता और प्रशासन के लिए गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं।
Rajasthan Health Minister Gajendra Singh Statement: पिछले दो महीनों में राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव और गुर्दे की विफलता के कारण 18 महिलाओं की असामयिक मौत ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे गंभीर मामला भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल का सामने आया है, जहां कुछ ही दिनों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की जान चली गई।
इस गंभीर स्वास्थ्य संकट और ऑपरेशन थिएटर में जीवनरक्षक उपकरणों की भारी कमी के बावजूद, जब स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से इस पर सवाल किया गया, तो उनका असंवेदनशील रवैया और “ब्रेक के बाद” जैसी टिप्पणियां सोशल मीडिया पर भारी विवाद का कारण बन गईं,। हालांकि प्रारंभिक रक्त जांच रिपोर्ट सामान्य आई है और विशेषज्ञों को अभी तक इन मौतों का कोई एक स्पष्ट कारण नहीं मिला है, लेकिन अस्पतालों में अत्यधिक दबाव और संसाधनों के अभाव ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। राज्य सरकार ने मामले की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन बढ़ते मातृ मृत्यु आंकड़े जनता और प्रशासन के लिए गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं।
