कालापानी, लिपुलेख के बीच PM बालेन शाह का विवादित बयान! क्या है ‘दसगजा’ बॉर्डर का पूरा गणित? VIDEO
Nepal PM Balendra Shah statement on India border: भारत नेपाल के बीच कालापानी और लिपुलेख को लेकर विवाद ठंडा नहीं हुआ था इस बीच पीएम बालेन शाह ने ऐसा बयान दिया जिसके बाद दोनों देशों को लेकर बवाल मच गया।
- Written By: तनमय बरनवाल
Nepal border Dispute: नेपाल PM ने भारत को लेकर ऐसा बयान दिया जिसके बाद इसकी चर्चा काफी होने लगी है। भारत और रोटी बेटी के रिश्तों वाले पड़ोसी देश नेपाल के सदियों पुराने रिश्तों के बीच सीमा विवाद को लेकर एक नया और हैरान कर देने वाला बखेड़ा सामने आया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने अपनी ही संसद में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए एक बेहद विवादित टिप्पणी की। उन्होंने सीधे तौर पर बयान दिया और कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि न सिर्फ भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है।
बालेन शाह के इस बयान के बाद नेपाल की घरेलू राजनीति और मीडिया में ऐसा भूचाल आया कि नेपाल के विदेश मंत्रालय को आनन-फानन में इस पर एक विस्तृत आधिकारिक सफाई जारी करनी पड़ी। विदेश मंत्रालय के पोस्ट के मुताबिक, पीएम का इशारा किसी नए इलाके पर संप्रभुता के दावे के बजाय ‘दसगजा’ यानी नो-मैन्स-लैंड एरिया में होने वाले क्रॉस-बॉर्डर अतिक्रमण और फिक्स्ड बाउंड्री सिद्धांत से जुड़ा था, जहां दोनों तरफ के नागरिक स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे की सीमा में खेती या निवास कर रहे हैं। आखिर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के पुराने विवादों के बीच बालेन शाह के इस कबूलनामे के क्या कूटनीतिक मायने हैं? क्या दोनों देश बातचीत से इसका समाधान निकालेंगे? देखिए इस पूरे भू-राजनीतिक विवाद का सटीक विश्लेषण.
Nepal border Dispute: नेपाल PM ने भारत को लेकर ऐसा बयान दिया जिसके बाद इसकी चर्चा काफी होने लगी है। भारत और रोटी बेटी के रिश्तों वाले पड़ोसी देश नेपाल के सदियों पुराने रिश्तों के बीच सीमा विवाद को लेकर एक नया और हैरान कर देने वाला बखेड़ा सामने आया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने अपनी ही संसद में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए एक बेहद विवादित टिप्पणी की। उन्होंने सीधे तौर पर बयान दिया और कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि न सिर्फ भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है।
बालेन शाह के इस बयान के बाद नेपाल की घरेलू राजनीति और मीडिया में ऐसा भूचाल आया कि नेपाल के विदेश मंत्रालय को आनन-फानन में इस पर एक विस्तृत आधिकारिक सफाई जारी करनी पड़ी। विदेश मंत्रालय के पोस्ट के मुताबिक, पीएम का इशारा किसी नए इलाके पर संप्रभुता के दावे के बजाय ‘दसगजा’ यानी नो-मैन्स-लैंड एरिया में होने वाले क्रॉस-बॉर्डर अतिक्रमण और फिक्स्ड बाउंड्री सिद्धांत से जुड़ा था, जहां दोनों तरफ के नागरिक स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे की सीमा में खेती या निवास कर रहे हैं। आखिर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के पुराने विवादों के बीच बालेन शाह के इस कबूलनामे के क्या कूटनीतिक मायने हैं? क्या दोनों देश बातचीत से इसका समाधान निकालेंगे? देखिए इस पूरे भू-राजनीतिक विवाद का सटीक विश्लेषण.
