समंदर के बीच नागपट्टिनम-कंकसंथुराई फेरी का इंजन फेल, 144 यात्रियों की अटकी सांसे; मछुआरों ने ऐसे किया रेस्क्यू
Nagapattinam Sri Lanka Ferry: भारत-श्रीलंका के बीच चलने वाली नागपट्टिनम-कंकसंथुराई फेरी का इंजन समुद्र के बीच फेल हो गया। यात्रियों की जान खतरे में पड़ने के बाद मछुआरों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन।
- Written By: अमन उपाध्याय
भारत और श्रीलंका के बीच दोस्ती और पर्यटन का प्रतीक मानी जाने वाली नागपट्टिनम-कंकसंथुराई फेरी सेवा शुक्रवार, 8 मई 2026 की रात एक बड़े हादसे का शिकार होते-होते बच गई। श्रीलंका के कंकसंथुराई से भारत के नागपट्टिनम की ओर आ रही इस यात्री नौका का इंजन नागपट्टिनम तट से महज दो समुद्री मील दूर किल्लर के पास अचानक फेल हो गया। उस वक्त नौका में 144 यात्री सवार थे। जिनमें 45 विदेशी नागरिक भी शामिल थे।
हादसे के समय समुद्र की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। चारों तरफ गहरा पानी, ऊंची लहरें और खराब मौसम के बीच नौका बीच समंदर में डगमगाने लगी। करीब 4 घंटे तक यात्री लहरों के बीच फंसे रहे, जिससे उनके बीच भारी घबराहट फैल गई। वहीं, नागपट्टिनम बंदरगाह पर अपने परिजनों का इंतजार कर रहे लोगों की सांसें भी अटकी हुई थीं।
अधिकारियों को जैसे ही इंजन फेल होने की सूचना मिली, प्रशासन में हड़कंप मच गया। खराब समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए अधिकारियों ने तुरंत स्थानीय मछुआरों से मदद मांगी। इन जांबाज मछुआरों ने अपनी छोटी-छोटी नावों के सहारे उस विशाल फेरी को बांधा और धीरे-धीरे खींचना शुरू किया। भारी मशक्कत के बाद देर रात नौका को सुरक्षित रूप से नागपट्टिनम बंदरगाह पर पहुंचा लिया गया।
भारत और श्रीलंका के बीच दोस्ती और पर्यटन का प्रतीक मानी जाने वाली नागपट्टिनम-कंकसंथुराई फेरी सेवा शुक्रवार, 8 मई 2026 की रात एक बड़े हादसे का शिकार होते-होते बच गई। श्रीलंका के कंकसंथुराई से भारत के नागपट्टिनम की ओर आ रही इस यात्री नौका का इंजन नागपट्टिनम तट से महज दो समुद्री मील दूर किल्लर के पास अचानक फेल हो गया। उस वक्त नौका में 144 यात्री सवार थे। जिनमें 45 विदेशी नागरिक भी शामिल थे।
हादसे के समय समुद्र की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। चारों तरफ गहरा पानी, ऊंची लहरें और खराब मौसम के बीच नौका बीच समंदर में डगमगाने लगी। करीब 4 घंटे तक यात्री लहरों के बीच फंसे रहे, जिससे उनके बीच भारी घबराहट फैल गई। वहीं, नागपट्टिनम बंदरगाह पर अपने परिजनों का इंतजार कर रहे लोगों की सांसें भी अटकी हुई थीं।
अधिकारियों को जैसे ही इंजन फेल होने की सूचना मिली, प्रशासन में हड़कंप मच गया। खराब समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए अधिकारियों ने तुरंत स्थानीय मछुआरों से मदद मांगी। इन जांबाज मछुआरों ने अपनी छोटी-छोटी नावों के सहारे उस विशाल फेरी को बांधा और धीरे-धीरे खींचना शुरू किया। भारी मशक्कत के बाद देर रात नौका को सुरक्षित रूप से नागपट्टिनम बंदरगाह पर पहुंचा लिया गया।
