ट्रक ड्राइवरों से लिफ्ट लेकर ट्रेनिंग जाती थीं मीराबाई चानू, कॉमनवेल्थ गेम्स में रचा इतिहास, देखें VIDEO
Mirabai Chanu Commonwealth Games gold: ट्रक ड्राइवरों से लिफ्ट मांगकर ट्रेनिंग कैंप जाने वाली मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
Mirabai Chanu struggle story: नवभारत लाइव की इस रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर के एक साधारण परिवार में जन्मी मीराबाई चानू का यहाँ तक का सफर भारी संघर्षों और अटूट जज्बे की कहानी है। उनके पिता पीडब्ल्यूडी में मामूली कर्मचारी थे और माँ चाय-समोसे की दुकान चलाती थीं। आर्थिक तंगी इतनी थी कि कई बार खाने के पैसे न होने पर वे पानी पीकर कड़ा अभ्यास करने जाती थीं। शुरुआती दिनों में बस का किराया न होने के कारण वह रेत से भरे ट्रकों के ड्राइवरों से लिफ्ट मांगकर 20-40 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग कैंप तक पहुँचती थीं।
बांस के तनों को बारबेल बनाकर अभ्यास करने वाली चानू ने अपनी असीम मेहनत और लगन के बल पर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया है। हाल ही में कॉमनवेल्थ खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया है। ओलंपिक सिल्वर मेडल, पद्मश्री और खेल रत्न से सम्मानित मीराबाई चानू की यह संघर्ष गाथा आज देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत बन चुकी है जो यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानकर कैसे शिखर पर पहुँचा जा सकता है।
Mirabai Chanu struggle story: नवभारत लाइव की इस रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर के एक साधारण परिवार में जन्मी मीराबाई चानू का यहाँ तक का सफर भारी संघर्षों और अटूट जज्बे की कहानी है। उनके पिता पीडब्ल्यूडी में मामूली कर्मचारी थे और माँ चाय-समोसे की दुकान चलाती थीं। आर्थिक तंगी इतनी थी कि कई बार खाने के पैसे न होने पर वे पानी पीकर कड़ा अभ्यास करने जाती थीं। शुरुआती दिनों में बस का किराया न होने के कारण वह रेत से भरे ट्रकों के ड्राइवरों से लिफ्ट मांगकर 20-40 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग कैंप तक पहुँचती थीं।
बांस के तनों को बारबेल बनाकर अभ्यास करने वाली चानू ने अपनी असीम मेहनत और लगन के बल पर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया है। हाल ही में कॉमनवेल्थ खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया है। ओलंपिक सिल्वर मेडल, पद्मश्री और खेल रत्न से सम्मानित मीराबाई चानू की यह संघर्ष गाथा आज देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत बन चुकी है जो यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानकर कैसे शिखर पर पहुँचा जा सकता है।
