बांकीपुर विधानसभा सीट पर किसका दबदबा? पीके की एंट्री से गरमाई सियासत। देखें VIDEO
Bihar Politics: बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की एंट्री ने बढ़ाई हलचल। क्या यह चुनाव सम्राट चौधरी सरकार के लिए जनमत संग्रह साबित होगा? जानिए बांकीपुर की सियासी जंग।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
Bihar Assembly by-election 2026: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव राज्य की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है। पिछले तीन दशकों से यह सीट बीजेपी का अभेद्य किला रही है, लेकिन इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
यह चुनाव न केवल बीजेपी के लिए अपनी साख बचाने की चुनौती है, बल्कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए भी एक बड़ी अग्निपरीक्षा है, क्योंकि यह उनके सत्ता संभालने के बाद राज्य का पहला उपचुनाव है। प्रशांत किशोर अपने प्रचार में भोजपुर मुठभेड़, नीट परीक्षा मामला, टेंडर घोटाला और भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठा रहे हैं, जिससे मुकाबला सिर्फ एक सीट का न रहकर राज्य की राजनीति का केंद्र बन गया है अब यह देखना होगा कि क्या बीजेपी अपना दबदबा बरकरार रख पाएगी या पीके का नया राजनीतिक प्रयोग कोई बड़ा उलटफेर करेगा।
Bihar Assembly by-election 2026: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव राज्य की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है। पिछले तीन दशकों से यह सीट बीजेपी का अभेद्य किला रही है, लेकिन इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
यह चुनाव न केवल बीजेपी के लिए अपनी साख बचाने की चुनौती है, बल्कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए भी एक बड़ी अग्निपरीक्षा है, क्योंकि यह उनके सत्ता संभालने के बाद राज्य का पहला उपचुनाव है। प्रशांत किशोर अपने प्रचार में भोजपुर मुठभेड़, नीट परीक्षा मामला, टेंडर घोटाला और भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठा रहे हैं, जिससे मुकाबला सिर्फ एक सीट का न रहकर राज्य की राजनीति का केंद्र बन गया है अब यह देखना होगा कि क्या बीजेपी अपना दबदबा बरकरार रख पाएगी या पीके का नया राजनीतिक प्रयोग कोई बड़ा उलटफेर करेगा।
