उत्तराखंड में 9 दिन बाद UCC में लिव-इन के लिए हुआ रजिस्ट्रेशन, इस कन्फ्यूजन से कपल्स की बढ़ रही टेंशन
UCC को लेकर सरकार का दावा है कि लिव-इन में रहने के लिए दी गई जानकारी पूरी तरह से गोपनियता रखी जाएगी। बहरहाल लिव इन रिलेशनशिप विवाद और बहस के बीच पहला रजिस्ट्रेशन पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
कॉन्सेप्ट फोटो, सोशल मीडिया
देहरादून : उत्तराखंड में यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद लिव इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता मिल गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका पहला रजिस्ट्रेशन भी हो गया है। ऐसे में दो अन्य एप्लिकेशन की जांच भी चल रही है।
बता दें, पहला रजिस्ट्रेशन जिनका हुआ है वो कपल्स हिंदू है। यूसीसी लागू होने के बाद लिव इन रिलेशनशिप पर उत्तराखंड में नई बहस छिड़ी हुई है लेकिन उसमें एक परेशानी 16 पन्नों का रजिस्ट्रेशन फॉर्म भी है।
लोगों के बीच है यह भ्रम
16 पन्नों के रजिस्ट्रेशन फॉर्म में कुछ ऐसे प्रावधान भी हैं, जिसे लेकर लोगों में भ्रम बना हुआ है। इसमे से एक भ्रम यह है कि लिव इन में रहने के लिए धर्मगुरुओं से अनुमति लेनी होगी। आपको बता दें कि यह भ्रम पूरी तरह गलत है। ऐसा कोई प्रावधान यूसीसी के नियमावली में नहीं है। यानी लिव-इन में रहने के लिए किसी पंडित या मौलवी की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी, लेकिन ये प्रावधान विशेष समुदाय के लिए दिए गए हैं जिनमें कजन मैरिज की प्रथा है। उसमें भी उनके धर्मगुरु सिर्फ ये बताएंगे कि उनके समुदाय में ऐसी प्रथा है या नहीं।
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तमाम तरह की जानकारी देना बन रहा बाधा
उत्तराखंड में यूनिफार्म सिविल कोड के रजिस्ट्रेशन को लेकर 16 पेज का फॉर्म भरना, मकान मालिक से लेकर तमाम तरह की जानकारी देना युवाओं को गंवारा नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि ये सरकार का उनकी प्राइवेसी में अनावश्यक दखल है। बता दें, उत्तराखंड में 27 जनवरी से लागू किए गए यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत लिव इन रिलेशनशिप सबसे ज्यादा चर्चाओं में है।
यूसीसी को लेकर सरकार का क्या है राय
युवाओं में भी इसको लेकर मिली जुली राय सामने आ रही है। कुछ युवाओं का कहना है कि सरकार को युवाओं की प्राइवेसी में ताक झांक नहीं करनी चाहिए। कुछ युवाओं का कहना है कि इससे समाज को सही दिशा में ले जाने में मदद मिल सकती है।
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ऐसे में यूसीसीस को लेकर सरकार का दावा है कि लिव-इन में रहने के लिए दी गई जानकारी पूरी तरह से गोपनियता रखी जाएगी। बहरहाल यूसीसी और खासकर लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन को लेकर विवाद और बहस के बीच लिव इन का पहला रजिस्ट्रेशन पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
