अब और नहीं बर्दाश्त…आगरा में शराब ठेके पर टूटा महिलाओं का गुस्सा, बीच सड़क फूंक डालीं पेटियां!
Agra Liquor Shop Protest: एक स्थानीय महिला ने गुस्से में कहा कि हमने अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब बच्चों का माहौल खराब होने लगा तो मजबूरी में हमें खुद सड़क पर उतरना पड़ा।
- Written By: मनोज आर्या
घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस, (सोर्स- नवभारत ब्यूरो)
Agra Liquor Shop Protest: उत्तर प्रदेश के आगरा में बुधवार सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को चौंका दिया। आमतौर पर घर-परिवार को संभालने वाली महिलाएं अचानक सड़क पर उतर आईं। हाथों में गुस्सा, आंखों में आक्रोश और दिल में बच्चों की चिंता लिए महिलाओं ने शराब के ठेके के खिलाफ ऐसा विरोध किया कि इलाके में हड़कंप मच गया।
मामला आगरा के थाना ट्रांस यमुना क्षेत्र स्थित नगला चंदन (रामबाग, चंदन नगर) का है, जहां बड़ी संख्या में महिलाओं ने शराब ठेके का ताला तोड़ दिया। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान शराब की पेटियों में आग भी लगा दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करना पड़ा।
‘सुबह 4 बजे से खुल जाता है ठेका’
स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि इलाके में सुबह तड़के 4-5 बजे से शराब की बिक्री शुरू हो जाती है। इसके चलते दिन निकलने से पहले ही शराबियों का जमावड़ा लग जाता है। महिलाओं का कहना है कि रास्तों में अभद्रता, गाली-गलौज और झगड़ों का माहौल आम हो गया था।
सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा था। स्कूल जाने वाली बच्चियों को असहज माहौल से गुजरना पड़ता था, जबकि परिवारों में तनाव और झगड़े बढ़ने की शिकायतें भी सामने आईं।
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एक स्थानीय महिला ने गुस्से में कहा कि हमने अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब बच्चों का माहौल खराब होने लगा तो मजबूरी में हमें खुद सड़क पर उतरना पड़ा।
आक्रोश के पीछे सिर्फ गुस्सा नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि उस डर और बेबसी का विस्फोट था, जिसे महिलाएं लंबे समय से झेल रही थीं। उनका कहना है कि जब शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई, तब उन्हें कठोर कदम उठाने पड़े। हालांकि, विरोध के दौरान हुई तोड़फोड़ और आगजनी ने मामले को कानूनी दायरे में भी ला खड़ा किया है।
आबकारी विभाग ने क्या कहा?
सूचना पर थाना ट्रांस यमुना प्रभारी निरीक्षक हरेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने महिलाओं से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया और शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। साथ ही ठेका संचालक को निर्धारित समय से पहले शराब बिक्री न करने की सख्त चेतावनी दी गई।
वहीं जिला आबकारी अधिकारी के के.पी. यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले स्थानीय लोग इस मसले को लेकर उनसे मिले थे और 15 दिन में समाधान का भरोसा दिया गया था। लेकिन उन्होंने हमारे द्वारा कार्रवाई करने से पूर्व ही शराब के ठेके पर हमला कर दिया। जिला आबकारी अधिकारी ने सुबह 4–5 बजे शराब बिक्री के आरोपों को निराधार बताया, लेकिन तोड़फोड़ और आगजनी की घटना पर वैधानिक कार्रवाई की बात कही।
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सबसे बड़ा सवाल
क्या यह कानून हाथ में लेने की घटना है, या फिर वर्षों की अनसुनी शिकायतों से उपजा महिलाओं का दर्द? आगरा की यह घटना अब शराब नीति से ज्यादा महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों के माहौल और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रही है।
