

BJP Leader's Daughter Yashaswinee Raje Singh Support CJP: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सदर से बीजेपी विधायक रह चुके विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने सीजेपी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों का समर्थन किया है। इन विरोध प्रदर्शनों में नीट यूजी पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े दूसरे मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी।विरोध प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था और 36 दिनों के बाद 25 जुलाई को खत्म हुआ, जब प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और सरकार ने बाकी मांगें मान लीं।
खास बात यह है कि यशस्विनी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुई थीं। इस आंदोलन में देश भर के हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया और इसे कई बड़ी विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिला।
अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में यशस्विनी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया और धर्मेंद्र प्रधान द्वारा अपने इस्तीफे में इस्तेमाल की गई भाषा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस्तीफे को एक तरह से अहम मोड़ के तौर पर देखना सच में बहुत छोटी सोच है। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री द्वारा विरोध प्रदर्शनों और अपने पद छोड़ने के फैसले का जिक्र करते हुए इस्तेमाल की गई भाषा की भी आलोचना की।
अपने इस्तीफे के लेटर में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह चल रहे विवाद को 'छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचाने से रोकने' और यह पक्का करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं कि देश-विरोधी ताकतें स्थिति का फायदा न उठा सकें। उन्होंने कहा कि इस्तीफे के लेटर की भाषा खुद एक शहीद की भाषा से ज्यादा किसी ऐसे व्यक्ति की है जो पछतावे में है, माफी मांग रहा है और खुद को जवाबदेह ठहरा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी और उसके आंदोलन के बारे में बात करते हुए यशस्विनी ने कहा कि सीजेपी ने ज्यादातर गैर-राजनीतिक लोगों को अपने साथ लाने में सफल रहा। जो आमतौर पर ऐसी बातचीत से दूर रहते हैं। सीजेपी ने अपने नए मैसेजिंग, मीम्स के जरिए युवा और छात्रों के एक वर्ग को एकजुट करने का बहुत अच्छा काम किया। उनका फोकस इंस्टाग्राम पर था, जो बहुत अच्छा था क्योंकि वहीं हमने विरोध प्रदर्शनों की आम लोगों की इतनी कवरेज देखी।
बीजेपी नेता की बेटी ने धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रहलाद जोशी को नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाने के केंद्र सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाया और इसे एक बेकार मजाक बताया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को अब शिक्षा मंत्री बनाया गया है... सच कहूं तो, यह एक बहुत ही, बहुत ही बेजान मजाक जैसा लगता है।
यशस्विनी ने कहा कि वह अपने पिता के साथ राजनीतिक चर्चा से बचती हैं, जो 2024 में समाजवादी पार्टी के चंद्र प्रकाश से सीट हारने से पहले बीजेपी विधायक के तौर पर फतेहपुर सदर का प्रतिनिधित्व करते थे। उन्होंने कहा कि मैं घर पर भी नहीं रहती। मैं पिछले साढ़े तीन साल से भारत में हूं और मैं अकेले रहती हूं। उन्होंने आगे कहा कि मैंने उस तरह के माहौल में बिल्कुल भी हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। मैं कई सालों से वहां (फतेहपुर सदर) नहीं गई हूं। इसलिए मैं उन सबके और अपने बीच एक बहुत बड़ा फर्क बनाए रखती हूं। और इसीलिए मैं बिना किसी पाखंडी जैसा महसूस किए अपनी बातें कह पाती हूं।
यशस्विनी सिंह राजे उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सदर से बीजेपी विधायक रह चुके विक्रम सिंह की बेटी हैं। उन्होंने वर्ष 2014 के उपचुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले विक्रम सिंह ने वर्ष 2010 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। यशस्विनी एक कंटेट क्रिएटर हैं, जिन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (एलएसई) से डेवलपमेंट स्टडीज में एमएससी और किंग्स कॉलेज लंदन से इंटरनेशनल रिलेशंस में बीए की पढ़ाई की हैं। वे यूनिसेफ इंडिया, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव और यहां तक कि लंदन के सरकारी विभागों में इंटर्न या सलाहकार के रूप में काम कर चुकी हैं।
गौरतलब है कि 20 जुलाई कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा घोषित संसद मार्च के दौरान नई दिल्ली में पार्लियामेंट स्ट्रीट, कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। इस दौरान कुछ छात्र और पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के भी दावे किए जा रहे हैं।