

Varanasi Yamuneshwar Partheshwar Shivling: श्रावण मास की अमावस्या से यमुनेश्वर आश्रम के श्री महंत वैभव गिरि जी महाराज द्वारा भगवान भोलेनाथ की विशेष आराधना का अनुष्ठान शुरू किया गया है। इसके तहत प्रतिदिन पार्थेश्वर शिवलिंग का निर्माण कर विधि-विधान से स्थापना, पूजन एवं रुद्राभिषेक किया जाता है। पूजन के बाद शिवलिंग को मां गंगा की मध्य धारा में विधिवत विसर्जित किया जाता है।
महंत वैभव गिरि महाराज ने बताया कि यह अनुष्ठान श्रावण अमावस्या से शुरू होकर भाद्रपद अमावस्या तक लगातार चलेगा। प्रतिदिन पार्थेश्वर शिवलिंग को अलग-अलग स्वरूपों में सजाया जाता है। किसी दिन फल, किसी दिन सब्जियों तो किसी दिन गुलाब के पुष्पों से श्रृंगार किया जाता है। इसके साथ भस्म, चंदन, शमी पत्र सहित विभिन्न पूजन सामग्री से भगवान शिव का श्रृंगार कर अभिषेक और पूजन किया जाता है।
महंत वैभव गिरि ने बताया कि अनुष्ठान के दौरान भगवान भोलेनाथ से विश्व कल्याण, राष्ट्र की समृद्धि और समस्त जीवों के मंगल की कामना की जाती है। संतों के जीवन में व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से अधिक जनकल्याण और मानव समाज के मंगल का महत्व होता है। इसी भावना के साथ काशी सहित पूरे देश पर भगवान शिव की कृपा बनी रहने की प्रार्थना की जा रही है।
महंत ने कहा कि सनातन परंपराओं को मजबूत करने तथा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को विश्वभर में प्रतिष्ठित करने की भावना से यह अनुष्ठान किया जा रहा है। भगवान शिव से प्रार्थना है कि भारत निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और विश्व कल्याण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि काशी भगवान शिव की नगरी है और यहां होने वाली धार्मिक साधनाएं सदैव लोकमंगल की भावना से जुड़ी रही हैं। पार्थेश्वर शिवलिंग की प्रतिदिन स्थापना, पूजन और गंगा में विसर्जन इसी आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा है। अनुष्ठान के माध्यम से काशी, देश और पूरी दुनिया के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की जा रही है।