

Highlights:
मंदिर के लॉकर में यथास्थिति सुरक्षित है शिखर
शिखर की मरम्मत पर IIT मद्रास की सलाह
नवंबर में शिखर का होगा दोबारा निरीक्षण
शिखर संरक्षण के लिए बनेगी वैज्ञानिक कार्ययोजना
Kashi Vishwanath Temple Gold Missing: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर के क्षतिग्रस्त और सोना गायब होने की खबर मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है, जिसको लेकर मंदिर न्यास ने स्पष्टीकरण जारी किया है। न्यास के सदस्य ने बताया कि शिखर से सोना गायब होने की खबर पूरी तरह निराधार और भ्रामक है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2026 में क्षतिग्रस्त हुए शिखर को मंदिर के लॉकर में ठीक वैसे ही सुरक्षित रखा गया है, जैसा कि वह पहले थे।
मंदिर न्यास समीति ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य कोण पर स्थापित शिखर अप्रैल 2026 में क्षतिग्रस्त हो गया था, मंदिर की धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ उसके ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक महत्व को भी देखते हुए शिखर के संरक्षण एवं मरम्मत की प्रक्रिया विशेषज्ञों के तकनीकी परामर्श के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
बता दें कि मंदिर के मूल स्वरूप और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए आईआईटी मद्रास से तकनीकी परीक्षण और परामर्श ली जा रही है। इसी क्रम में संस्थान की विशेषज्ञ टीम ने काशी विश्वनाथ धाम का निरीक्षण किया था। जिसके बाद टीम ने जुलाई 2026 में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की थी। जिसके मुताबिक प्राकृतिक पत्थर और लकड़ी पर पर्यावरणीय प्रभावों के कारण होने वाले क्षरण का उल्लेख किया गया है। साथ ही टीम ने संरक्षण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित सभी सामग्री का सूक्ष्म विश्लेषण और आवश्यक तकनीकी जांच कराने की जरूरत बताई।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य काशी विश्वनाथ मंदिर की संरचना की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है, साथ ही वैज्ञानिक एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप संरक्षण की उपयुक्त कार्ययोजना तैयार होगा।
मंदिर न्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीम, नवंबर 2026 में एक बार फिर मुख्य मंदिर परिसर का निरीक्षण करने आएगी। निरीक्षण और आवश्यक तकनीकी परीक्षणों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाएगा।
मंदिर न्यास की रिपोर्ट में मंदिर की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उसकी धार्मिक न ऐतिहासिक महत्ता को संरक्षित रखने के लिए आवश्यक उपायों की संस्तुति दी जाएगी।
न्यास ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर की प्राचीन संरचना, धार्मिक गरिमा और ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण उसकी प्राथमिकता है। शिखर की मरम्मत और संरक्षण से जुड़े सभी कार्य विशेषज्ञों के परामर्श और वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार ही किए जाएंगे।