यूपी में मंत्रीमंडल विस्तार आज, 6 नेता बनेंगे मंत्री; अखिलेश यादव ने कसा तंज, बोले- 6 महीने में क्या होगा?

Uttar Pradesh Politics 2026: योगी सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए चेहरों को जगह मिली है, जिस पर अखिलेश यादव ने कड़ा तंज कसते हुए नौ साल बनाम नौ महीने का सवाल उठाया है।
CM Yogi cabinet expantion
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Yogi Cabinet Expansion: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी कैबिनेट का विस्तार करते हुए छह नए चेहरों को टीम में जगह दी है। ये सभी आज शपथ ग्रहण करेंगे। इस फैसले को आगामी चुनावों के लिहाज से एक बड़ा दांव माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी नई टीम में जातीय संतुलन साधने की भरपूर कोशिश की है। इस विस्तार में एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो दलित चेहरों को जगह दी गई है ताकि समाज के हर वर्ग तक एक मजबूत संदेश पहुंचाया जा सके।

नए मंत्रियों में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और प्रमुख जाट नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी का नाम सबसे ऊपर है, जिन्हें महत्वपूर्ण विभाग मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, रायबरेली से समाजवादी पार्टी के बागी विधायक मनोज पांडेय को भी मंत्री बनाकर भाजपा ने ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की एक बड़ी कोशिश की है।

अखिलेश यादव के तीखे सवाल और नौ साल का हिसाब

जैसे ही राजभवन में मंत्रियों के नामों की घोषणा हुई, वैसे ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में तंज कसते हुए पूछा कि जो सरकार पिछले नौ सालों में कुछ नहीं कर पाई, वह अब बचे हुए नौ महीनों में क्या चमत्कार कर दिखाएगी। अखिलेश ने अपने हमले में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को शामिल करते हुए कहा कि यह विस्तार केवल जनता का ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग पर लगातार प्रहार किया है और यह नए मंत्री भी वही करेंगे जो पिछली सरकार करती आई है।

दलबदलुओं की मौज या पुराने वफादारों की उपेक्षा?

अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में एक महत्वपूर्ण पेच की ओर भी इशारा किया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में केवल छह रिक्तियां शेष थीं, जबकि दूसरे दलों से पाला बदलकर भाजपा में आने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि आखिर किस आधार पर किसी एक को चुना जाएगा और बाकी बचे हुए दलबदलुओं का क्या होगा।

अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा के अपने कार्यकर्ता जो सालों से मंत्री बनने का इंतजार कर रहे हैं, क्या वे अब खुद को ठगा हुआ महसूस नहीं करेंगे। उनके अनुसार, दलबदलुओं को तरजीह देने से भाजपा के भीतर ही असंतोष की लहर पैदा हो सकती है जो आने वाले चुनाव में पार्टी को भारी पड़ेगी।

तीन मंत्रियों का प्रमोशन

कैबिनेट विस्तार की इस प्रक्रिया में केवल नए चेहरों की एंट्री ही नहीं हुई है, बल्कि कुछ पुराने साथियों के कंधों पर जिम्मेदारी का बोझ भी बढ़ाया गया है। खबर है कि नरेंद्र कश्यप, अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर जैसे राज्यमंत्रियों का कद बढ़ाकर उन्हें प्रमोट किया जा सकता है। जितिन प्रसाद के केंद्र में जाने के बाद से खाली पड़े पीडब्ल्यूडी जैसे भारी-भरकम विभाग की जिम्मेदारी भी अब नए हाथों में सौंपी जा सकती है।

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