यूपी STF का एक्शन: UP RO/ARO पेपर लीक मामले में दो साल से फरार आरोपी गिरफ्तार; 12 लाख रुपये में हुआ था सौदा

UP RO/ARO Paper Leak News: यूपीपीएससी आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा 2023 पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वर्षों से फरार आरोपी आलोक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
UP STF Accused absconding for two years UP RO/ARO paper leak case arrested
UP STF द्वारा गिरफ्तार आरोपी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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STF Action UP RO/ARO Paper Leak Case: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा-2023 के पेपर लीक मामले में फरार चल रहे एक आरोपी को स्पेशल टास्क फोर्स ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से फरार था और उसकी तलाश की जा रही थी।

गाजीपुर जिले के जंगीपुर थाना क्षेत्र का निवासी है आरोपी

गिरफ्तार आरोपी की पहचान गाजीपुर जिले के जंगीपुर थाना क्षेत्र स्थित मानपुर बाबू रायपुर निवासी आलोक कुमार के रूप में हुई है। एसटीएफ ने उसे मऊ शहर के मुंशीपुरा हयात सेंटर नई बस्ती इलाके से दबोच लिया। पुलिस के अनुसार आलोक ने पेपर लीक कराने वाले गिरोह से 12 लाख रूपये में सौदा किया था। इसके लिए उसने तीन लाख रूपये अग्रिम भुगतान भी किया था और लीक प्रश्नपत्र हासिल किया था। गिरफ्तारी के बाद गुरुवार देर रात आरोपी को प्रयागराज लाया गया, जहां सिविल लाइंस थाने में आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एसटीएफ का कहना है कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों और नेटवर्क की भी जांच जारी है। पेपर लीक प्रकरण को लेकर एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

भोपाल के एक होटल में ठहरे थे अभ्यर्थी

समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी पेपर 2023 लीक मामले की लम्बे समय से जांच में जुटी एसटीएफ को यह जानकारी मिली कि अभ्यर्थियों को मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित एक होटल में ठहराया गया था। वहां उन्हें कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र और उसके उत्तर याद कराए गए थे। बाद में परीक्षा के दौरान वही प्रश्न सामने आने का दावा किया गया। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कीं।

भोपाल के प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ पेपर

11 फरवरी 2024 को आयोजित आरओ व एआरओ प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने परीक्षा को निरस्त कर दिया और मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी थी। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि प्रश्नपत्र भोपाल की एक प्रिंटिंग प्रेस से भी लीक हुआ था, जहां परीक्षा सामग्री की छपाई की गई थी।

मामलें में अब तक चार गिरफ्तारी

अब तक समीक्षा अधिकारी पेपर लीक मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पेपर लीक गिरोह संगठित तरीके से प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलता था। मामले की जांच अभी भी जारी है और एजेंसियां गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। पेपर लीक प्रकरण ने प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि एसटीएफ का दावा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और पूरे नेटवर्क को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

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