ब्रजेश पाठक व इनसेट में विवादित सवाल (डिजाइन फोटो)
UP Police Exam: उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा के दौरान पूछे गए एक सवाल ने नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। परीक्षा के एक प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द को नकारात्मक विकल्प के रूप में पेश किए जाने पर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया है।
वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडित’ के शीर्षक पर हुए विवाद के बाद यह नया मामला सामने आया है। पहले दिन की परीक्षा में सामान्य हिंदी के पेपर में पूछा गया था कि अवसर के अनुसार बदल जाने वाला वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनें। इसके चार विकल्पों में सदाचारी, पंडित, अवसरवादी और निष्कपट शामिल थे।
इस प्रश्न पत्र के सोशल मीडिया पर शनिवार दोपहर वायरल होने के बाद विभिन्न संगठनों ने अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं और कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक्स प्लेटफार्म पर पोस्ट करते हुए इस प्रश्न के विकल्पों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमे कड़ी आपत्ति है ।सरकार ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। किसी भी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुँचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि किसी भी… — Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) March 14, 2026
उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे पूरी गंभीरता से संज्ञान में लिया है। पाठक ने कहा कि किसी भी प्रश्न से समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए।
उन्होंने आगे बताया कि इस पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है। प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में भाजपा के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि यह प्रश्न स्पष्ट रूप से गलत फ्रेम किया गया है और यह एक विशेष समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। सही अर्थ में अवसर के अनुसार बदल जाने वाला व्यक्ति अवसरवादी होता है। पंडित शब्द विद्वान, ज्ञानी और धार्मिक सम्मान से जुड़ा है। इसे अवसरवादी जैसे नकारात्मक अर्थ वाले शब्द के साथ जोड़ना अनुचित, असंवेदनशील और संभवत जानबूझकर किया गया कृत्य प्रतीत होता है।
इस पूरे विवाद पर अखिल भारत हिंदू महासभा ने भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और मामले में दोषियों के विरुद्ध सीधे मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है। मामले के लगातार तूल पकड़ने के बाद पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं और उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से साफ इन्कार कर दिया है।
विदित हो कि पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड अपनी परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने का काम बाहरी एजेंसी के माध्यम से करवाता है। एजेंसी को पद के अनुरूप विभिन्न विषयों का सिलेबस उपलब्ध कराया जाता है। एक अधिकारी के अनुसार हजारों प्रश्नों को कंप्यूटर के जरिए रेंडमाइज करके अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं, जिन्हें पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है। परीक्षा संपन्न कराने वाली एजेंसी के चयन को भी गोपनीय रखा जाता है।