

Smart Dustbin At Railway Station: देशभर के रेलवे स्टेशनों पर अब कूड़ेदानों से बाहर बिखरते कचरे और उससे होने वाली गंदगी से निजात मिलने की उम्मीद है। रेलवे स्टेशनों को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए पुराने पारंपरिक कूड़ेदानों की जगह इनबिल्ट कॉम्पेक्टर (कचरा दबाने की मशीन) से लैस आधुनिक ‘स्मार्ट डस्टबिन’ लगाए जाएंगे। इन स्मार्ट डस्टबिन में आईओटी सेंसर लगे होंगे। जैसे ही डस्टबिन कूड़े से भर जाएगा, इसकी सूचना संबंधित सफाई कर्मचारियों के मोबाइल एप और फ्लिट डैशबोर्ड पर अलर्ट के रूप में भेज दी जाएगी।
स्मार्ट डस्टबिन में लगे सेंसर कूड़े की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे। कूड़ेदान भरने पर सफाई कर्मियों को समय रहते सूचना मिल जाएगी। इससे स्टेशन परिसर में कूड़ा फैलने और लंबे समय तक डस्टबिन भरे रहने की समस्या कम करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में सामान्य खुले कूड़ेदान सीमित क्षमता के कारण कुछ ही घंटों में भर जाते हैं और सफाई कर्मचारियों को इनके भरने की सटीक जानकारी समय पर नहीं मिल पाती।
प्रस्तावित स्मार्ट डस्टबिन की क्षमता 200 लीटर से अधिक होगी। इसमें जमा सूखे कचरे को मशीन स्वचालित तरीके से दबाकर उसका आकार छोटा करेगी। मशीन प्रतिदिन करीब 100 चक्र तक कचरे को कॉम्पैक्ट करने में सक्षम होगी। इससे सामान्य डस्टबिन की तुलना में अधिक कचरा एकत्र किया जा सकेगा और सफाई व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। रेलवे बोर्ड की कैंटीन में ऐसे दो डस्टबिन का प्रायोगिक परीक्षण भी किया जा चुका है।
स्मार्ट डस्टबिन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए इसके संचालन में सौर ऊर्जा का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बिजली की बचत के साथ हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। डस्टबिन में फुट पैडल की सुविधा भी होगी। पैर से पैडल दबाते ही इनवर्ड-ओपनिंग फ्लैप खुल जाएगा। इस व्यवस्था से हाथ लगाए बिना कूड़ा डालना संभव होगा।
स्मार्ट डस्टबिन को इस तरह तैयार किया गया है कि बारिश, धूप और बंदर जैसे जानवर भी इसके अंदर रखे कचरे को बाहर न निकाल सकें। इससे स्टेशन परिसर में कूड़ा बिखरने की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। रेलवे बोर्ड की संयुक्त निदेशक (पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग मैनेजमेंट) अमिता भल्ला के अनुसार, सभी जोन को स्मार्ट बिन लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इससे स्टेशनों की सफाई व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने और कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।