

आगामी चुनाव प्रभावित करने के लिए बनाई जा रही थी तमंचों की भारी खेप
हरियाणा और यूपी के कई जिलों में था नेटवर्क
मात्र 5 हजार रुपये में बेचे जाते थे अवैध तमंचे
Illegal Firearms Consignment Uncovered: उत्तर प्रदेश के शामली में पुलिस ने आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए रची जा रही एक खतरनाक साजिश का पर्दाफाश किया है। कैराना कोतवाली पुलिस की मुस्तैदी से अवैध शस्त्र निर्माण करने वाली तमंचा फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। एसपी शामली नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में बने और अधबने तमंचे, विभिन्न प्रकार के कारतूस, नाल, बट, स्प्रिंग और शस्त्र बनाने वाले आधुनिक उपकरण बरामद किए है। इसके साथ ही पुलिस ने फैक्ट्री के मुख्य संचालक को भी रंगे हाथों दबोचा, जो अपने खेत के ट्यूबवेल की आड़ में इस गैर-कानूनी काले कारोबार को लंबे समय से अंजाम दे रहा था।
शामली के कैराना कोतवाली क्षेत्र में पुलिस को बीते कई दिनों से लगातार यह सूचना मिल रही थी कि इलाके में अवैध हथियारों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है। कुछ असामाजिक तत्व इन तमंचों का खुलकर प्रदर्शन कर रहे थे और दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी कर रहे थे। इस सूचना पर पुलिस प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया। कैराना कोतवाली पुलिस ने जब अपनी जांच का दायरा बढ़ाया तो बरनावी गांव के रहने वाले हारून पुत्र मुंशी का नाम मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आया। इसके बाद पुलिस ने बीती रात उसके खेत की कोठरी पर अचानक छापा मार दिया।
पुलिस की इस अचानक की गई कार्रवाई में आरोपी हारून को अवैध रूप से हथियार बनाते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। ट्यूबवेल की कोठरी से पुलिस ने कुल 21 बने हुए अवैध तमंचे और कारतूस बरामद किए जिनमें 315 बोर के 12 तमंचे, 12 बोर का एक तमंचा, एक पोनिया तमंचा और 315 बोर के 9 जिंदा कारतूस शामिल है। इसके अलावा मौके से 19 अधबने तमंचे, विभिन्न बोर की 13 और 10 नाल, 15 अधबनी बट बाड़ी, ट्रिगर, स्प्रिंग और बड़ी संख्या में लोहे के पार्ट्स तथा लकड़ी के बट मिले हैं। हथियारों को तराशने के लिए इस्तेमाल होने वाली ग्राइंडर मशीन, ड्रिल मशीन, रेती और आरी जैसे तमाम औजार भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए हैं।
पुलिस पूछताछ में आरोपी हारून ने बताया कि यह पूरी खेप आगामी चुनावों के दौरान माहौल खराब करने और अवैध कमाई के लिए तैयार की जा रही थी। आरोपी खुद भी तमंचे बनाने में माहिर था और मांग बढ़ने पर बाहर से पेशेवर कारीगरों को बुलाकर ट्यूबवेल पर हथियार बनवाता था। तैयार किए गए इन हथियारों को वह हरियाणा के सोनीपत, पानीपत, करनाल के अलावा उत्तर प्रदेश के शामली, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में अपने मिडिलमैन के नेटवर्क के जरिए मात्र 5,000 रुपये प्रति तमंचा बेच देता था। इसके बाद ये बिचौलिए इन अवैध तमंचों को आम लोगों और अपराधियों को कई गुना महंगे दामों में सप्लाई करते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस सिंडिकेट के तार दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए आरिफ नाम के शातिर अपराधी से भी जुड़े हैं जो अवैध पिस्तौल मंगवाने का काम करता था। पहले यह गिरोह मध्य प्रदेश के बुरहानपुर और महाराष्ट्र से अवैध हथियार मंगवाता था लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद जब वहां की सप्लाई चेन टूटी तो इन्होंने स्थानीय स्तर पर ही ट्यूबवेल को हथियार निर्माण का अड्डा बना लिया। एसपी शामली नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह पुलिस टीम के लिए एक बड़ी सफलता है। इस तरह के अपराधियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।