संभल हिंसा में नाबालिग की मौत पर कोर्ट सख्त, ASP अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश
Sambhal Violence में नाबालिग आलम की मौत के मामले में चन्दौसी की सीजेएम कोर्ट ने बड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने एएसपी अनुज चौधरी और 11 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
ASP अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश, फोटो- सोशल मीडिया
Sambhal Violence FIR: उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2024 में भड़की हिंसा के मामले में न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। चन्दौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने एक नाबालिग लड़के की मौत के मामले में तत्कालीन क्षेत्राधिकारी और वर्तमान एएसपी अनुज चौधरी सहित 12 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी किया है।
संभल में हिंसा की यह घटना 24 नवंबर 2024 को हुई थी, जब शाही जामा मस्जिद के अदालती आदेश पर सर्वे का कार्य चल रहा था। इस दौरान सर्वे का विरोध कर रही हजारों की भीड़ और पुलिस के बीच टकराव हो गया था। स्थिति इतनी बेकाबू हुई कि जमकर पथराव और फायरिंग की घटनाएं हुईं, जिसमें कई पुलिसकर्मी और आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसी अफरा-तफरी के बीच मोहल्ला खगूसराय के निवासी आलम नाम के एक नाबालिग युवक को गोली लग गई थी। उसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
‘बिस्किट बेचने गया था बेटा और मार दी गोली’- पिता का आरोप
आलम की मौत के बाद उसके पिता यामीन ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। यामीन द्वारा दायर याचिका में दिल दहला देने वाले दावे किए गए थे। याचिका के मुताबिक, 24 नवंबर को आलम घर से बिस्कुट बेचने निकला था। जैसे ही वह जामा मस्जिद के समीप पहुँचा, पुलिस की ओर से चलाई गई गोली उसे लग गई। पिता का आरोप है कि उनका बेटा हिंसा में शामिल नहीं था, बल्कि वह केवल अपना काम कर रहा था। इस याचिका पर चन्दौसी की सीजेएम कोर्ट में लंबी सुनवाई चली, जिसके बाद अदालत ने माना कि घटना की सच्चाई जानने के लिए प्राथमिक जांच और एफआईआर अनिवार्य है।
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एएसपी अनुज चौधरी समेत इन अधिकारियों पर गिरेगी गाज
कोर्ट ने जिन 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है, उनमें सबसे चर्चित नाम एएसपी अनुज चौधरी का है। उल्लेखनीय है कि घटना के समय अनुज चौधरी संभल में क्षेत्राधिकारी (सीओ) सदर के पद पर तैनात थे। घटना के कुछ समय बाद ही उन्हें पदोन्नति मिली और वे एएसपी बनकर फिरोजाबाद स्थानांतरित हो गए थे। उनके साथ ही पूर्व सदर कोतवाल अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों को भी इस मामले में आरोपी बनाने का निर्देश दिया गया है।
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क्या हैं न्यायिक आदेश के मायने, आगे क्या होगा?
सीजेएम कोर्ट के इस फैसले ने उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में हलचल तेज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग की मौत एक गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस अधिकारियों पर मामला दर्ज होना जरूरी है। यह आदेश उस प्रशासनिक दावे को भी चुनौती देता है जो हिंसा के दौरान पुलिस की कार्रवाई को बचाव की मुद्रा में देख रहा था। अब इस आदेश के बाद जिला पुलिस को अपने ही वरिष्ठ सहयोगियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिससे आलम के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
