

Saharanpur Mosque Demolition Case: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मस्जिद कमेटी को अंतरिम राहत देते हुए छह करोड़ रुपए से अधिक की क्षतिपूर्ति वसूली के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब भी मांगा है। बता दें किमोहम्मद तनवीर की याचिका पर न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
बता दें कि याचिका में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी है। याचीकर्ता ने आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने पर्याप्त नोटिस और सक्षम आदेश के बिना ही मस्जिद को ध्वस्त करा दिया। इतना ही नहीं याचिका में कार्रवाई को लेकर प्रक्रिया संबंधी कई सवाल भी उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से बिजली का बिल स्वीकार नहीं किए जाने, गवाहों की पूरी गवाही दर्ज नहीं करने और मामले को बहस में लगाकर अंतिम आदेश पारित किए जाने समेत कई आधारों पर प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती दी गई है।
बता दें कि याचिकाकर्ता ने पूजा स्थल अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। मामले में नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद कमेटी से करीब 6.41 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ कमेटी ने जिला जज की अदालत में अपील की थी। दो सितंबर को जिला अदालत ने अपील खारिज की दी नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का रुख किया। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विवादित ढांचे को लेकर विवाद सरकारी जमीन पर कथित अनधिकृत कब्जे से जुड़ा है।
राजस्व विभाग ने मार्च 2025 में शिकायत के आधार पर मामले की जांच और कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन के मुताबिक, कलेक्ट्रेट परिसर की करीब 315 वर्ग मीटर जमीन, खसरा संख्या 539, पर बने ढांचे को बिना अनुमति धार्मिक स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रशासन का दावा था कि जमीन कलेक्ट्रेट परिसर की पुरानी विश्रामशाला से संबंधित थी और उस पर अनधिकृत तरीके से धार्मिक ढांचा बनाया गया।
मस्जिद कमेटी की ओर से इसे पुराना धार्मिक स्थल बताते हुए दावा किया गया कि मस्जिद सौ साल से अधिक पुरानी है और वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज है। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को ढांचे से बेदखली का आदेश पारित किया था। बाद में जिला अदालत से भी राहत नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने पांच सितंबर की देर रात से छह सितंबर की सुबह के बीच भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ढांचे को ध्वस्त कर दिया था।
ध्वस्तीकरण के बाद मस्जिद कमेटी ने प्रशासन की कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी। अब हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब करते हुए छह करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।