कौन दानपात्र से पैसे निकालेगा; राम मंदिर में चोरी करने के लिए बनायी जाती थी, हर रोज एक नई योजना

Donation Box Theft: राम मंदिर के दानपात्र से चोरी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी रोज प्लानिंग करते थे कि कौन पैसे चुराएगा और कौन सीसीटीवी के सामने खड़ा रहेगा।
Major revelation regarding the theft of Ram Mandir donations! A full-fledged plan was hatched to evade CCTV surveillance.
अयोध्या राम मंदिर (सोर्स सोशल मीडिया)
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Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर में चल रहे चढ़ावे चोरी के मामले की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना यह है कि आरोपी अपनी चोरी को बेहद संगठित तरीके से अंजाम देते थे। इतना ही नही अपनी ड्यूटी पर जाने से पहले सभी आपस में फोन पर बात कर पूरी योजना बनाते थे और उसके बाद हर व्यक्ति की जिम्मेदारी पहले से ही तय कर दी जाती थी।

पुलिस की पूछताछ में प्राप्त हुई जानकारी

आपको बता दे कि पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि कौन दानपात्र से पैसे निकालेगा, कौन उन्हें छिपाएगा और कौन सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़े होकर कैमरे का व्यू ब्लॉक करेगा। ताकि चोरी की घटना रिकॉर्ड न हो सके। आरोपियों की जिम्मेदारियां भी बदल-बदलकर तय की जाती थीं। जिससे किसी एक व्यक्ति पर लगातार शक न जाए।

सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं

जांच कर रही एसआईटी को अब तक सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं मिली हैं। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या आरोपियों की सीसीटीवी कंट्रोल रूम तक भी पहुंचे थे या नहीं। अधिकारियों ने मीडिया से हुई बातचीत में बताया है कि सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों के पूछताछ में दिए गए बयानों की भी पुष्टि हुई है।

8 आरोपियों की न्यायिक हिरासत आज समाप्त

वहीं दूसरी ओर, इस मामले में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों की न्यायिक हिरासत आज समाप्त हो रही है। अयोध्या पुलिस उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश करेगी। संभावना यह बताई जा रही है कि पुलिस आगे की पूछताछ के लिए टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक अविनाश, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश से पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ हो चुकी है, जबकि टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर मिश्रा और मनीष यादव से विस्तृत पूछताछ अभी बाकी है।

आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियां दर्ज होने का दावा

रिपोर्ट के अनुसार चोरी के बाद दान की रकम आरोपियों के बीच बांट दी जाती थी। हालांकि, पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कुछ मौकों पर अविनाश ने अन्य आरोपियों की तुलना में अधिक रकम अपने पास रखी। बता दें कि SIT की जांच में अब तक सीसीटीवी फुटेज के लगभग 70 ऐसे मौके सामने आए हैं, जिनमें आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियां दर्ज होने का दावा किया गया है। इन्हीं फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसी पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी है।

सीसीटीवी फुटेज से मिले अहम सुराग

जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज में कई बार अविनाश और मनीष संदिग्ध गतिविधियां करते नजर आए हैं। फुटेज में दोनों दानपात्र से निकले नोटों को व्यवस्थित करते और मौका मिलते ही उन्हें अपने कपड़ों में छिपाते दिखाई दिए।वहीं दूसरी ओर, अनुकल्प, करुणेश, लवकुश और अन्य आरोपी कथित तौर पर कैमरों के सामने इस तरह खड़े होते थे कि सीसीटीवी का दृश्य बाधित हो जाए और पैसे निकालने की पूरी गतिविधि स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड न हो सके।

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