राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सपा नेता पवन पांडे का दावा- अखिलेश यादव को पहले मिली थी जानकारी

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सपा नेता पवन पांडे ने दावा किया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सबसे पहले चोरी की सूचना मिली थी। अखिलेश ने उन्हें फोन कर बातचीत की थी।
Ram Mandir donation theft case: SP leader Pawan Pandey claims Akhilesh Yadav had prior information.
पवन पांडे (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब सियासी और धार्मिक बहस का मुद्दा बन गया है। अब इस मामलें में समाजवादी पार्टी के नेता और अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडे ने दावा किया है कि इसकी जानकारी सबसे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव को मिली थी। पवन पांडे का कहना है कि अखिलेश यादव ने स्वयं उन्हें फोन कर इस संबंध में बातचीत की थी।

एक पॉडकास्ट के दौरान बातचीत में पवन पांडे ने कहा कि अखिलेश यादव को पहले से सूचना मिली थी कि राम मंदिर के चढ़ावे और आभूषणों में कुछ गड़बड़ी हो रही है। इसलिए अखिलेश यादव ने पहले अपने स्तर पर जानकारी की पुष्टि की उसके बाद ही अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया फिर मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।

बंटवारे के विवाद से मामला सामने आया

समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे ने दावा किया कि चोरी का मामला दो कारणों से सामने आया। पहला, उनके अनुसार भगवान राम की इच्छा से यह सच उजागर हुआ। दूसरा उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी में शामिल लोगों के बीच हिस्सेदारी और बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया था जिसके कारण यह मामला बाहर आया।

पवन पांडे ने आरोप लगाया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती करने वाले लोगों के बीच नकदी, आभूषण यहां तक की चांदी के बंटवारे को लेकर काफी विवाद हुआ और इसी वजह से कथित अनियमितताओं की जानकारी सबके सामने आई।

राम मंदिर ट्रस्ट पर लगाए गंभीर आरोप

सपा नेता पवन पांडे ने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में बिना चंपत राय की सहमति के कोई निर्णय नहीं होता था और कथित तौर पर चोरी में शामिल लोगों को उन्होंने संरक्षण भी दिया।

पांडे ने यह भी कहा कि यदि ट्रस्ट के पदाधिकारी पूरी तरह निर्दोष थे तो उनके सामने इस्तीफा देने की नौबत कैसे आई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि आरोप निराधार थे तो ट्रस्ट ने आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया।

पांडे ने SIT जांच पर भी उठाए सवाल

सपा नेता पवन पांडे ने मामले की जांच कर रही एसआईटी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें जांच की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है। पांडे के अनुसार शिकायतकर्ता भी ट्रस्ट है और रिपोर्ट भी उन्ही को सौंपी जानी है ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे होगी। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए। पांडे ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट का पुनर्गठन भी होना चाहिए।

व्यक्तिगत दावे

बता दें कि पवन पांडे द्वारा लगाए गए सभी आरोप उनके व्यक्तिगत दावे थे। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां सभी तथ्यों की पड़ताल भी कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो पाएगी।

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