उत्तर प्रदेश के होंगे टुकड़े…बुंदेलखंड से उठी मांग, भाजपा का अखिलेश यादव को रोकने का हो सकता है मास्टरप्लान
उत्तर प्रदेश को एक बार फिर टुकड़ों में बांटने की मांग उठ रही है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की कोशिश कर चुकी हैं, लेकिन भारी नाराजगी पीछे हटना पड़ा था।
- Written By: Saurabh Pal
राहुल, अखिलेश, नरेंद्र मोदी और शाह (फोटो- डिजाइन नवभारत)
लखनऊः उत्तर प्रदेश को एक बार फिर टुकड़ों में बांटने की मांग उठ रही है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की कोशिश कर चुकी हैं, लेकिन भारी नाराजगी व विपक्षी नेताओं के विरोध के चलते उन्हें पीछे हटना पड़ा था। इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने भी प्रस्ताव वापिस कर दिया था। इस बार आवाज बुंदेलखंड से उठी है। बुंदेलखंड क्षेत्र के रहने वाले फिल्म कलाकार राजा बुंदेला इस समय अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर ‘गांव-गांव पांव-पांव’ यात्रा निकाल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैला बुंदेलखंड वाटर क्राइसिस की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे कई जिलें हैं जिनके कुछ हिस्सों में किसानी की बात तो छोड़ों पीने के पानी के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। यूपी और एमपी के अन्य हिस्सों की अपेक्षा बुंदेलखंड ज्यादा पिछड़ा हुआ भी नजर आता है। हालांकि इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार द्वारा कई प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसके बाद भी पर्यटन की आपार संभावनाओं वाले इस हिस्से को अलग राज्य बनाने की मांग चल रही है।
यूपी एमपी के बीच पिस रहा बुंदेलखंड
सम्बंधित ख़बरें
नवभारत निशानेबाज: गिफ्ट का पड़ेगा अनुकूल प्रभाव, मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ
Explainer: GPFG क्या है? मछुआरों के देश से दुनिया का सबसे अमीर देश कैसे बना नॉर्वे, भारत से चार गुना है दौलत
नवभाारत विशेष: PM Modi का मिशन Life, सोच-समझकर जीवनयापन भी योग है
प्रयागराज में खाकी के एकतरफा झुकाव से भड़के डॉक्टर! ठप होगी पूरी स्वास्थ्य सेवा, महा-संग्राम का ऐलान
राजा बुंदेला कहते हैं कि बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों के बीच पिस रहा है। यहां कोई विकास कार्य नहीं हुआ, जिसके चलते लोग पलायन कर रहे हैं। ‘गांव-गांव, पांव-पांव’ यात्रा पहले चरण में 12 अक्टूबर को यह यात्रा ललितपुर से झांसी तक चली। दूसरे चरण में 26 दिसंबर को यात्रा जालौन से शुरू हुई। 10 जनवरी को यह उरई में खत्म होगी। राजा बुंदेला कहते हैं, अभी तक इस यात्रा में जो चीज सबसे बड़ी निकलकर आई है, वो है पलायन और विकास।
2027 के परिसीमन के बाद हो सकता है फैसला
बुंदेला बुदेंलखंड को अलग राज्य बनाने की मांग के पीछे राजनीतिक तर्क भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि 2027 में पूरे देश में परिसीमन होगा। इसके बाद 402 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में करीब 700 विधानसभा सीटें हो जाएंगी और 80 की जगह 120 लोकसभा सीटें हो जाएंगी। इतन बड़े राज्य को न पीएम मोदी संभाल पाएंगे और न ही अमित शाह संभाल पाएंगे। इसलिए बुंदेलखंड को अलग कर दिया जाए। चाहे इसे केंद्र शाषित प्रदेश ही बना दिया जाए।
देश की ख़बरों के लिए यहां क्लिक करें
बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुल 13 जिले
उत्तर प्रदेश के सात ज़िले: चित्रकूट, बांदा, झांसी, जालौन, हमीरपुर, महोबा, और ललितपुर
मध्य प्रदेश के छह ज़िले: छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, सागर, दतिया, और पन्ना
मायावती ने दिया था प्रस्ताव
बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2011 यूपी को चार हिस्सों पूर्वांचल, पश्चिम प्रदेश, अवध प्रदेश और बुंदेलखण्ड में बांटने का प्रस्ताव विधानसभा में पास किया था। इसके बाद इस प्रस्ताव को यूपीए-2 वाली केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्र सरकार ने कई स्पष्टीकरण मांगते हुए प्रस्ताव वापिस कर दिया। इसके बाद यूपी को चार हिस्सों को बांटने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
सपा ने हमेशा किया विरोध
इसके बाद पिछले साल संजीव बालियान ने भी यूपी को बांटने का मु्द्दा उठाया था। हालांकि जब भी बंटवारे की बात समजावादी पार्टी ने हमेशा इसका विरोध किया। वहीं दूसरी तरफ भाजपा की तरफ से बालियान के अलावा कभी कभी किसी नेता ने यूपी के बांटवारे का जिक्र नहीं किया। सूत्रों के अनुसार भाजपा अभी इसपर एकमत नहीं है, लेकिन ज्यादातर का मानना है कि यूपी के बंटवारे के पक्ष में भाजपा है।
सपा को रोकने का प्लान!
इसके राजनीतिक कारण भी है। देश में भाजपा और कांग्रेस के बाद सबसे बड़े जन समूह पर समाजवादी पार्टी का प्रभाव है। इस बार देश 37 सांसदों के जीतने के बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा और अन्य दलों की कोशिश रहेगी कि समाजवादी पार्टी को यूपी के हिस्से में समेट दिया जाए। जिससे राष्ट्रीय पार्टियों का दबदबा बरकरार रहे।
