मथुरा के संतों ने संभाला मोर्चा…तो ढीले पड़े रामभद्राचार्य, बोले- पुत्र के समान हैं प्रेमानंद
Rambhadracharya on Premanand: रामभद्राचार्य ने कहा है कि सभी हिंदुओं को आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ रहना चाहिए। मैंने प्रेमानंद जी के लिए कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है, वे मेरे लिए पुत्र समान हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह
रामभद्राचार्य व प्रेमानंद (डिजाइन फोटो)
Rambhadracharya vs Premanand: संत प्रेमानंद महाराज पर अपने कथित बयान को लेकर उठे विवाद के बीच अब आध्यात्मिक जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। रामभद्राचार्य ने कहा है कि उन्होंने प्रेमानंद जी या किसी भी संत के लिए कभी कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है और न ही भविष्य में करेंगे। साथ ही, संत समाज में कोई मतभेद नहीं है और प्रेमानंद जी उनके लिए पुत्र समान हैं।
आपको बता दें कि रामभद्राचार्य ने एक इंटरव्यू में कहा था कि प्रेमानंद महाराज न तो विद्वान हैं और न ही चमत्कारी। इसके साथ ही उन्होंने प्रेमानंद बाबा को बच्चा बताया और खुली चुनौती भी दी। जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया था। सोशल मीडिया पर लोग लगातार उनकी आलोचना कर रहे थे।
हिंदुओं को मतभेद भुलाकर रहना चाहिए
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा है कि सभी हिंदुओं को आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ रहना चाहिए। मैंने प्रेमानंद जी के लिए कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है, वे मेरे लिए पुत्र समान हैं। मेरी भी उम्र हो गई है, इसलिए आचार्य होने के नाते मैं सभी से कहता हूं कि उन्हें संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए। हर हिंदू को संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए। मैं खुद आज भी 18 घंटे अध्ययन करता हूं।
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मेरे बारे में फैलाया जा रहा भ्रम: रामभद्राचार्य
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि हां, यह सही है कि मैं आज चमत्कारों को प्रणाम नहीं करता। मैंने अपने शिष्य धीरेंद्र शास्त्री को भी अध्ययन करने को कहा है। सभी संत मेरे प्रिय भजन हैं। सभी संतों को एकजुट होकर हिंदू धर्म की रक्षा के लिए तत्पर रहना चाहिए। मेरे बारे में फैलाया जा रहा भ्रम गलत है।
‘मैंने प्रेमानंद के बारे में गलत टिप्पणी नहीं की’
रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि मैंने प्रेमानंद या किसी भी संत के बारे में कोई गलत टिप्पणी नहीं की है और न ही करूंगा। जब भी प्रेमानंद मुझसे मिलने आएंगे, मैं उन्हें आशीर्वाद दूंगा, गले लगाऊंगा और भगवान श्री राम से उनके स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करूंगा।
क्यों उठ खड़ा हुआ था विवाद?
आपको बता दें कि रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज के आध्यात्मिक चमत्कारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक सच्चा विद्वान वह है जो संस्कृत शास्त्रों की गहराई को समझ सके और उनका उच्चारण कर सके। अगर कोई चमत्कार है, तो मैं प्रेमानंद जी को चुनौती देता हूं कि वे संस्कृत का एक भी शब्द बोलें या मेरे द्वारा कहे गए संस्कृत श्लोकों की व्याख्या करें।
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उन्होंने कहा था कि मैं आज खुलकर कह रहा हूं, वे इस उम्र में भी मेरे बच्चे जैसे हैं। रामभद्राचार्य ने आगे कहा था कि केवल शास्त्रों को जानने वाले ही चमत्कार कर सकते हैं। उनकी किडनी डायलिसिस हो रही है। वह डायलिसिस की वजह से ज़िंदा हैं, उन्हें जीने दो और जो करना है करने दो।
