

UP Board Admission Rule: छात्र-छात्राओं की जन्मतिथि को लेकर होने वाले विवाद और हाईस्कूल प्रमाणपत्र में संशोधन के बढ़ते मामलों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने स्कूलों को प्रवेश के समय ही अभिलेखों की जांच को लेकर सतर्क कर दिया है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों में विद्यार्थियों की जन्मतिथि दर्ज करते समय मान्य अभिलेखों का ठीक से मिलान किया जाए। प्रवेश के समय दर्ज जन्मतिथि ही आगे चलकर बोर्ड अभिलेखों का आधार बनती है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है।
बोर्ड के निर्देश के अनुसार छात्र की जन्मतिथि के सत्यापन के लिए उपलब्ध मान्य अभिलेखों को प्राथमिकता दी जाएगी। जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अस्पताल या एएनएम का पंजीयन अभिलेख, आंगनबाड़ी अभिलेख, जन्म-मृत्यु संबंधी ग्राम पंचायत अभिलेख अथवा माता-पिता या अभिभावक के शपथपत्र के माध्यम से की गई घोषणा को आधार बनाया जा सकता है। विद्यालयों को प्रवेश के समय अभिलेखों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के बाद ही जन्मतिथि दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
बोर्ड सचिव ने कहा है कि हाईस्कूल प्रमाणपत्र-सह-अंकपत्र में जन्मतिथि महत्वपूर्ण होने के कारण किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने के लिए विशेष सावधानी जरूरी है। माध्यमिक स्तर से प्राप्त होने वाले मामलों में कई बार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की सत्यापित टीसी को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित रिकॉर्ड की गहन जांच की जरूरत होगी।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ बच्चों की प्रवेश के समय आयु शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 में निर्धारित आयु से कम पाई गई है। आरटीई के तहत कक्षा एक में प्रवेश के लिए छह वर्ष की आयु निर्धारित है। ऐसे मामलों में जन्मतिथि के प्रमाण के लिए जन्म प्रमाणपत्र को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने पर विद्यालयों को प्रवेश के समय मान्य अभिलेखों के आधार पर जन्मतिथि दर्ज करने और संबंधित रिकॉर्ड में उसका स्पष्ट उल्लेख करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे आगे चलकर जन्मतिथि संशोधन के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी