

UP Board New Exam Pattern 2027: यूपी बोर्ड ने विद्यार्थियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करते समय केवल रटने की क्षमता पर ही जोर नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों के ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग, विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजनात्मक क्षमता को भी परखा जाएगा। नई व्यवस्था भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्थापित परख मूल्यांकन केंद्र के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है। इसके तहत मॉडल प्रश्नपत्रों में छह प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है।
पहले चरण में कक्षा 11 और 12 के इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र विषयों के मॉडल प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं। इनमें ज्ञान व बोध को परखने वाले 17.5 प्रतिशत, अनुप्रयोग क्षमता के 35 प्रतिशत, विश्लेषण संबंधी 22 प्रतिशत तथा मूल्यांकन और सृजन क्षमता को परखने वाले चार-चार प्रतिशत प्रश्न शामिल हैं।
वहीं प्रतिशत का शेष हिस्सा समझ और कौशल की जांच से संबंधित है। इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों में केवल विषय याद करने के बजाय उसे समझने और व्यवहार में लागू करने की क्षमता विकसित करना है।
यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह के अनुसार विद्यार्थियों में रटने की जगह चिंतन, तर्क, मूल्यांकन शक्ति, विश्लेषण और सृजनात्मकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। व्यावहारिक विषयों को छोड़कर प्रत्येक विषय की लिखित परीक्षा 100 अंकों की होगी, जबकि नए प्रश्नपत्रों में लिखित परीक्षा के लिए पूर्णांक 80 निर्धारित किए गए हैं। वर्णनात्मक प्रश्नों की संख्या भी कम की गई है। प्रत्येक विस्तृत उत्तरीय प्रश्न में आंतरिक विकल्प के रूप में प्रश्न दिए जाएंगे, जो उसी यूनिट, उद्देश्य और कठिनाई स्तर के होंगे।
नई व्यवस्था में बाह्य विकल्प के प्रश्न नहीं होंगे। विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के सभी खंडों का अध्ययन करना पड़ेगा। प्रश्नपत्र में करीब 30 प्रतिशत प्रश्न सरल, 50 प्रतिशत सामान्य और 20 प्रतिशत कठिन श्रेणी के होंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की समग्र क्षमता का संतुलित मूल्यांकन करना है।
यह बदलाव नई शिक्षा नीति-2020 और परख के तहत विद्यार्थियों के समग्र विकास की अवधारणा से जुड़ा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पंचकोश विकास पर जोर दिया गया है। इसमें भौतिक, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश शामिल हैं। नई मूल्यांकन व्यवस्था का लक्ष्य विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास को ध्यान में रखते हुए उनकी क्षमताओं का आकलन करना है।