

Agra: एक दिन में तीन बड़े आयोजन, बॉलीवुड अभिनेत्री महिमा चौधरी की मौजूदगी से सजेगा गोल्डन एक्सीलेंस अवॉर्ड शोSanskrit Schools Teacher Vacancy UP: प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का असर अब विद्यार्थियों की पढ़ाई और संस्कृत शिक्षा की परंपरा पर पड़ने लगा है। प्रदेश में संचालित 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के 2549 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें महज 940 शिक्षक ही तैनात हैं।
यानी बड़ी संख्या में पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। प्रधानाचार्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। 657 स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल 170 प्रधानाचार्य ही कार्यरत हैं।
शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। नियमित कक्षाएं संचालित नहीं होने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और संस्कृत के प्रति उनकी रुचि भी कम होती जा रही है।
प्रांतीय संस्कृत विद्यालय कल्याण समिति के प्रदेश महामंत्री आनंद उपाध्याय के मुताबिक कई विद्यालयों में शिक्षकों और अन्य संसाधनों का अभाव है। कुछ विद्यालय संविदा शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहे हैं।
शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की कमी को देखते हुए शासन ने संस्कृत विद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी। इसके तहत माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की भर्ती शिक्षा सेवा चयन आयोग के बजाय विद्यालयों के प्रबंधकों के माध्यम से कराए जाने की बात कही गई है। हालांकि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने कहा है कि शासन के आदेश के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। वहीं एडी माध्यमिक कामता राम पाल का कहना है कि संस्कृत विद्यालयों में भर्ती प्रबंधकों को ही करनी है, चयन आयोग इनकी नियुक्ति नहीं करेगा।
शिक्षा निदेशालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार वर्ष 2011 में मंडलीय समिति के माध्यम से संस्कृत विद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया हुई थी। इसके तहत अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन और बस्ती मंडल में नियुक्तियां हुईं, जबकि आजमगढ़ मंडल में मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण नियुक्तियां नहीं हो सकीं।
संस्कृत केवल एक विषय नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष और शास्त्रीय ज्ञान की प्रमुख भाषा है। ऐसे में विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का असर केवल मौजूदा विद्यार्थियों की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि माध्यमिक स्तर पर संस्कृत शिक्षा कमजोर होने से उच्च शिक्षा में संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों और संस्कृत के विद्वानों की नई पीढ़ी पर भी इसका असर पड़ सकता है।
प्रदेश के 570 संस्कृत विद्यालयों में खाली पड़े पदों पर शीघ्र नियुक्ति होने से ही शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की उम्मीद है।