

Ganga Yamuna Water Level Prayagraj: प्रयागराज में लगातार हो रही बारिश और गंगा यमुना में मिलने वाली नदियों में बढ़ रहे जल स्तर को देखते हुए प्रयागराज में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ को स्थिति को देखते हुए जिले में बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन सक्रिय हो गया है।
प्रयागराज और उसके पड़ोसी जिलों में पिछले 25 घंटे से हो रही बारिश से आम आदमी की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। इधर कानपुर के गंगा बैराज से सोमवार शाम आठ बजे 3.06 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसका असर मंगलवार की रात से पड़ना स्वाभाविक है। जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को सुबह 8 बजे कानपुर बैराज पर जलस्तर खतरे के बिंदु से करीब 26 सेंटीमीटर नीचे है। बाढ़ के हालात को देखते हुए कानपुर के गंगा बैराज से 3,09,365 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।
ऊपरी बैराजों से भी पानी छोड़ा जा रहा है। हरिद्वार बैराज से 1,00,375 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 77,819 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है। यह पानी 24 घंटे के अंतराल पर प्रयागराज पहुंच सकता है जो स्थानीय लोगों के लिए आफत बन सकता है।
नदियों में छोड़े जा रहे बाढ़ के पानी और पड़ोसी जिलों में हो रही लगातार बारिश की स्थिति से प्रयागराज के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाली 20 लाख से अधिक की आबादी पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियां खतरे के निशान खतरे के निशान 84.73 मीटर से लगभग दो मीटर नीचे है लेकिन दोनों नदियों में जल स्तर में बढ़ोत्तरी जारी है। इसका असर शहरी और ग्रामीण इलाकों में अभी से दिखने लगा है।
शहरी क्षेत्र के निचले इलाकों के 9 से अधिक मोहल्लों बाढ़ का पानी घरों में घुसने लगा है। शहर के दारागंज, छोटा बघाड़ा, मऊ सरैया, गंगा नगर, ओम नगर, शांति पुरम और उचवा गढ़ी जैसे मोहल्लों में घरों में घुस रहे पानी को देखते हुए लोगों ने अपनी गृहस्थी और सामान ऊपर की मंजिलों या पड़ोस के घरों में रखना शुरू कर दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यमुना पार से अधिक गंगा पार की आबादी बाढ़ के खतरे की चपेट में है। जिले के 102 से अधिक गांवों पर बाढ़ के पानी का खतरा है। मेजा, कोरांव और नारीबारी इलाके में टोंस और भोगनवेलन नदी का जल तबाही बरपाने की तरफ बढ़ रहा है तो इनका सम्मिलित बाढ़ का पानी यमुना में जाकर बाढ़ की स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
जलभराव के बाद अब बाढ़ का विकराल रूप जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। जिले की बाढ़ राहत प्रभारी एडीएम विनीता सिंह बताती हैं कि बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है।
प्रयागराज में 88 बाढ़ राहत चौकियां बनाई गई है। एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम, पीएसी की दो कंपनिया और जल पुलिस की टीम सक्रिय है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आपदा बल भी बुलाया जायेगा। शहर में बाढ़ पीड़ितों के लिए 93 शिविर बनाए गए हैं जिसमें अभी 100 से अधिक बाढ़ पीड़ित पहुंचे हैं।