

Meerut road construction: ना चाहते हुए भी जनपद मेरठ के शहरवासियों को धूल-मिट्टी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके चलते न केवल फेफड़ों से संबंधित बल्कि आंखों के मरीज भी लगातार सरकारी और निजी अस्पतालों में अपना इलाज कराने पहुंच रहे है। यह हम नहीं आंकड़े बता रहे हैं। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो दरअसल, सीएम ग्रिड योजना के चलते शहर-भर में काम चल रहा है।
हालांकि, शहर की सड़कों के कायाकल्प का काम शुरु हुए लगभग दो साल बीत चुके हैं लेकिन काम अभी तक अधूरा पड़ा हुआ है। जिसके चलते शहर वासियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि, सब कुछ जानते हुए भी नगर निगम अधिकारी और कर्मचारी आंखें मुद्दे बैठे है। जिसके चलते शहर वासियों में नगर निगम अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
दरअसल, कम ग्रेड योजना के तहत शहर भर में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। लेकिन इन विकास कार्यों के चलते कहीं ना कहीं शहर वासी रोजाना धूल मिट्टी फांकने को मजबूर है। फिर चाहे बात गढ़ रोड की हो या शारदा रोड, सर्किट हाउस रोड, टीपीनगर रोड सब सड़कें खुदी पड़ी है और सड़क निर्माण कार्यों में अनियमितता की शिकायत लगातार आ रही है। ऐसे में इन सड़कों को बनाने वाली कंपनी पर बार बार जुर्माना लगाकर समय से काम कराने का प्रयास तो किया जा रहा है, लेकिन जुर्माने का प्रयास भी सार्थक साबित नही हो रहा है। कंपनी की लापरवाही के चलते काम धीमी गति से ही चल रहा है और शहर की सूरत बदलने के बजाए बिगड़ती जा रही है।
गौरतलब है कि शहर में एक साथ प्रमुख आठ सड़कों पर एक साथ निर्माण कार्य होने से जगह-जगह गड्ढे और अव्यवस्था हो गई है। निर्माण कार्य के चलते यातायात भी प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि एक ही ठेकेदार को शहर में 12 सड़कों का ठेका देने से ना तो कोई काम समय से पूरा हो रहा है और ना ही गुणवत्ता पूर्वक काम हो रहा है। ठेकेदार की लापरवाही के चलते गढ़ रोड, वेस्टर्न कचहरी रोड, कमिश्नर आवास चौराहे से सर्किट हाउस, शारदा रोड, ट्रांसपोर्ट नगर सहित शहर में आठ सड़के खुदी पड़ी हैं।
इसमें करीब 240 करोड़ रूपए का बजट व्यय किया जा रहा है। लेकिन कंपनी के ठेकेदार ने एक सड़क का भी निर्माण कार्य पूरा नही किया। कंपनी की लापरवाही के चलते नगर निगम ने निर्माण कंपनी पर दो बार 5 - 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाकर खानापूर्ति तो कर दी, लेकिन इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। शारदा रोड और टीपीनगर रोड के लिए लगे इस जुर्माने के बाद भी कंपनी के काम में तेजी नही आई।
इसके अलावा गढ़ रोड पर गांधी आश्रम से तेजगढ़ी चौराहे तक, कमिश्नरी आवास चौराहे से सर्किट हाउस चौराहे तक, गढ़ रोड रंगोली होते हुए हापुड़ रोड तक और कमिश्नरी कार्यालय चौराहे से बच्चा पार्क चौराहे तक चार प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण का काम भी धीमी गति से चल रहा है।
गढ़ रोड - 20 प्रतिशत काम बाकि
शारदा रोड- 27 प्रतिशत काम हुआ अब तक
टीपीनगर रोड- 29 प्रतिशत काम हुआ अब तक।
इतना ही नही सड़कों के निर्माण के लिए तय बजट में काम पूरा हुआ भी नही और ठेकेदारों ने खर्च बढ़ा दिया। बीच निर्माण बजट बढ़ने से तीन माह तक काम रुक गया था। हालांकि बाद में अतिरिक्त बजट भी जारी कर दिया गया लेकिन इसके बाद भी काम की गति नही बढ़ी।
गढ़ रोड से रंगोली होते हुए हापुड़ रोड तक 38 करोड़ रुपये 2.15 से 2.50 किमी रोड के लिए
कमिश्नर आवास चौराहे से सर्किट हाउस तक 20 करोड़ रुपये 1.0 किमी रोड के लिए
कमिश्नर कार्यालय चौराहे से बच्चा पार्क चौराहे तक 27 करोड़ रुपये 1.6 किमी रोड के लिए
गांधी आश्रम चौराहे से तेजगढ़ी चौराहे तक 48 करोड़ रुपये 2.0 किमी रोड के लिए
गढ़ रोड पर काम लगभग पूरा हो चुका है। बाकि शारदा रोड टीपीनगर के लिए चेतावनी दी जा चुकी है यदि जल्द कंपनी ने काम पूरा नही किया तो ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। सौरंभ गंगवार, नगरायुक्त
जुर्माने की कार्यवाही काफी नही है। कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर सख्त कार्यवाही की जाए तो इसका असर दिखेगा। शरद देसाई