

Highlights:
महाकुंभ के बाद भी जाम से जूझ रहा प्रयागराज
चौड़ी सड़कों पर अतिक्रमण का कब्जा
महाकुंभ के लिए सड़कों के विकास पर खर्च हुए करोड़ों
अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग ने बिगाड़ी यातायात व्यवस्था
Prayagraj Encroachment News: संगम नगरी को जाम की झाम से निजात दिलाने के लिए महाकुंभ-2025 से पहले बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण, चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण के काम कराए गए। शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए फ्लाईओवर भी बनाए गए, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद शहरवासियों को जाम से राहत नहीं मिल पा रही है। इसकी प्रमुख वजहों में सड़कों पर अतिक्रमण, बेतरतीब पार्किंग, सड़क की जगह पर व्यावसायिक गतिविधियां और यातायात प्रबंधन की कमजोरियां शामिल हैं।
शहर के कई प्रमुख इलाकों में दिनभर वाहन रेंगते नजर आते हैं। पुराने शहर के बाजारों से लेकर सिविल लाइंस, हाईकोर्ट मार्ग, मेडिकल कॉलेज क्षेत्र, रेलवे स्टेशन, रामबाग, तेलियरगंज और फाफामऊ तक यातायात का दबाव लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सड़कों की चौड़ाई बढ़ाई गई और यातायात के लिए नए ढांचे तैयार किए गए, तो जाम की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका?
महाकुंभ-2025 की तैयारियों के दौरान शहर में सौ सड़कों पर विकास का काम कराया गया था। इनमें नगर निगम की 78, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की 74 और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) की 48 सड़कें शामिल थीं। इन पर नई सड़क बनाने, चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण जैसे कार्य हुए।
इनमें शहरी क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक मार्गों पर चौड़ीकरण के काम भी शामिल बताए जाते हैं। प्रमुख मार्गों में पुराने यमुना पुल से लेप्रोसी चौराहा, लेप्रोसी चौराहे से नैनी रेलवे स्टेशन, नैनी रेलवे स्टेशन से प्रयागराज-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग और वहां से छिवकी रेलवे स्टेशन होते हुए सीओडी क्रॉसिंग तक के मार्ग शामिल हैं।
इसी तरह छिवकी रेलवे स्टेशन के गेट नंबर-दो से सीओडी क्रॉसिंग, आजाद पार्क के गेट नंबर-छह से सोहबतियाबाग क्रॉसिंग, ईसीसी कॉलेज से नूरुल्लाह रोड और फाफामऊ-शांतिपुरम से बेला कछार पार्किंग तक के मार्गों पर भी विकास कार्य कराए गए। आईईआरटी से सादियाबाद, सलोरी, कैलाशपुरी और तेलियरगंज चौराहे को जोड़ने वाले मार्ग भी इस सूची में शामिल हैं।
सड़कों को चौड़ा करने के पीछे यातायात का दबाव कम करना और आवागमन सुगम बनाना प्रमुख उद्देश्य था। लेकिन कई स्थानों पर सड़क के किनारे दुकानों का विस्तार, अस्थायी कब्जे और वाहनों की पार्किंग उपलब्ध सड़क का हिस्सा घेर लेते हैं। इससे चौड़ी सड़क का पूरा लाभ यातायात को नहीं मिल पाता।
स्थिति यह है कि कई मार्गों पर वाहनों के लिए उपलब्ध जगह कम हो जाती है। इसके बाद किसी चौराहे पर वाहनों की रफ्तार धीमी होते ही पीछे तक कतार लगने लगती है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद भी यदि नियमित निगरानी नहीं होती, तो कुछ समय बाद वही स्थिति लौट आती है।
यह समस्या केवल सड़क की चौड़ाई तक सीमित नहीं है। चौराहों का प्रबंधन, सड़क किनारे सामान रखने पर नियंत्रण और वाहनों की आवाजाही के लिए निर्धारित स्थान बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
सिविल लाइंस जैसे व्यावसायिक क्षेत्र में सड़क के किनारे वाहनों की मरम्मत, बाइक सर्विसिंग और गाड़ियों की सजावट जैसी गतिविधियों के कारण उपलब्ध जगह प्रभावित होने की शिकायत है। यदि ऐसे काम सड़क या सार्वजनिक स्थान पर किए जाते हैं, तो गुजरने वाले वाहनों और पैदल यात्रियों को परेशानी होती है।
कटरा, चौक, हाईकोर्ट मार्ग और नैनी के कुछ हिस्सों में भी व्यावसायिक गतिविधियों, सामान रखने और वाहनों के खड़े होने से यातायात प्रभावित होने की समस्या सामने आती है। सड़क का उपयोग आवागमन के बजाय दूसरे कार्यों के लिए होने लगे, तो चौड़ीकरण के बाद भी जाम की आशंका बनी रहती है।
ऐसे मामलों में नगर निगम, यातायात पुलिस और संबंधित विकास एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी है। केवल कभी-कभार अतिक्रमण हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। नियमित कार्रवाई के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक सड़क का इस्तेमाल तय उद्देश्य के अनुरूप हो।
शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र चौक बाजार में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को पार्किंग की समस्या का सामना करना पड़ता है। निर्धारित पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और सड़क किनारे वाहनों के खड़े होने से आवागमन प्रभावित होता है। दुकानों के सामने सामान फैलने या फुटपाथ पर कब्जे की स्थिति में पैदल चलने वालों के लिए भी जगह कम पड़ जाती है।
बाजारों में पार्किंग की समस्या का समाधान केवल चालान या वाहन हटाने की कार्रवाई से नहीं होगा। इसके लिए व्यवस्थित पार्किंग स्थल, लोडिंग-अनलोडिंग के लिए तय समय और पैदल यात्रियों के लिए अतिक्रमण मुक्त रास्ते सुनिश्चित करने होंगे।
अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। कुछ स्थानों पर कार्रवाई के बाद रास्ता खाली भी कराया जाता है, लेकिन नियमित निगरानी के अभाव में अतिक्रमण दोबारा होने की शिकायत रहती है। यातायात पुलिस की भूमिका भी केवल जाम लगने के बाद वाहनों को निकलवाने तक सीमित नहीं रह सकती। जिन स्थानों पर रोजाना जाम लगता है, वहां कारणों की पहचान कर स्थाई व्यवस्था बनानी होगी।
इस मामले में संबंधित अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही भी जरूरी है। अतिक्रमण हटाने, अवैध पार्किंग रोकने और सड़क पर व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों में बंटी होने के कारण समन्वय की चुनौती सामने आती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस क्षेत्र में कार्रवाई की जिम्मेदारी किस विभाग की है और उसका नियमित निरीक्षण कौन करेगा।
प्रयागराज में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर के साथ कुछ बुनियादी कदम भी जरूरी हैं। प्रमुख जाम वाले चौराहों का सर्वे, सड़क किनारे अतिक्रमण पर नियमित निगरानी, बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते और पीक आवर्स में प्रभावी यातायात प्रबंधन से राहत मिल सकती है।
महाकुंभ के लिए विकसित सड़क ढांचे का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब सड़क पर उपलब्ध जगह का इस्तेमाल सुचारु आवागमन के लिए हो। अब जरूरत केवल नए निर्माण की नहीं, बल्कि बने हुए ढांचे के बेहतर प्रबंधन और जवाबदेही तय करने की है। सवाल यही है कि प्रयागराज को जाम से राहत दिलाने के लिए बनी योजनाओं का लाभ लोगों तक कब पहुंचेगा।