

Indian Railway E Bank Guarantee: भारतीय रेलवे के टेंडर और आपूर्ति बाजार में लंबे समय से चली आ रही कागजी बैंक गारंटी की व्यवस्था अब समाप्त होने जा रही है। रेलवे ने टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाले ठेकेदारों के लिए पारंपरिक कागजी बैंक गारंटी को अमान्य कर दिया है।
इसके स्थान पर अब अनिवार्य रूप से ई-बैंक गारंटी (ई-बीजी) व्यवस्था लागू की गई है। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में 10 अगस्त को आदेश जारी किया है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और सुरक्षित बनाना है। इसके साथ ही फर्जी बैंक गारंटी जमा करने और सांठगांठ के माध्यम से टेंडर हथियाने वाले सिंडिकेट पर भी प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
रेलवे के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल (आईआरईपीएस) को नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड (एनईएसएल) के साथ एकीकृत किया गया है। अब टेंडर में बयाना राशि और सुरक्षा जमा के लिए भौतिक दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
डिजिटल सत्यापन प्रणाली के माध्यम से बैंक गारंटी की वैधता की जांच कुछ ही मिनटों में की जा सकेगी। इससे रेलवे अधिकारियों के लिए दस्तावेजों की जांच आसान होगी और ठेकेदारों को भी कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। नई व्यवस्था देशभर में रेलवे के टेंडर पर लागू होगी।
रेलवे ने टेंडर प्रक्रिया के नियमों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब किसी भी खुले टेंडर की समयावधि को दो स्पष्ट हिस्सों में बांटा जाएगा। इसमें विज्ञापन अवधि और प्रस्ताव प्रस्तुति अवधि शामिल होगी। इससे निविदा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए समयसीमा स्पष्ट रहेगी।
नए नियमों के मुताबिक टेंडर से जुड़े किसी नियम या शर्त में संशोधन यानी कॉरिजेंडम केवल शुरुआती विज्ञापन अवधि के दौरान ही किया जा सकेगा। बोली जमा करने के अंतिम दस दिनों में किसी भी प्रकार का संशोधन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि अंतिम दिनों में किसी संशोधन की आवश्यकता पड़ती है तो मौजूदा टेंडर को रद्द कर नए सिरे से निविदा आमंत्रित करनी होगी।
रेलवे के मुताबिक ई-बैंक गारंटी जमा करने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ समय और कागजी कार्यवाही दोनों की बचत होगी।