AU Foundation Day: 140वें वर्ष में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, ऐतिहासिक गौरव के साथ आधुनिक तकनीक में बढ़े मजबूत कदम

Allahabad University 140th Year: इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने आज स्थापना के 139 वर्ष पूरे कर 140वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' अब AI, डेटा साइंस से गढ़ रहा आधुनिक भारत का नया भविष्य।
Allahabad University Foundation Day
इलाहाबाद विश्वविद्यालयसोर्स- सोशल मीडिया
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Allahabad University Foundation Day: देश की प्रशासनिक, बौद्धिक और अकादमिक चेतना को दिशा देने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) अब अपनी गौरवशाली विरासत को संग्रहालय में संजोने के बजाय उसे नए भारत की जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। 23 सितंबर को स्थापना के 139 वर्ष पूरे कर विश्वविद्यालय 140वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।

विश्वविद्यालय में पिछले कुछ वर्षों में हुए बदलावों के जरिए पुरानी प्रतिष्ठा को नए संदर्भ में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

ए-प्लस ग्रेड से बढ़ी अकादमिक सक्रियता

नैक से ए-प्लस ग्रेड मिलने के बाद विश्वविद्यालय में एनआईआरएफ के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं। 400 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षण और शोध को नई ताकत मिली है। शोध परियोजनाओं में बढ़ोतरी के साथ विश्वविद्यालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ी है।

नेट-जेआरएफ समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में 100 से अधिक छात्रों की सफलता को विश्वविद्यालय अपनी बदलती अकादमिक संस्कृति का संकेत मानता है। इविवि की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा में शैक्षणिक विस्तार के कई चरण आए हैं।

12 साल में तैयार हुआ था ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक इमारतें आज भी उसके गौरवशाली अतीत की कहानी कहती हैं। इतिहासकार प्रो. योगेश्वर तिवारी के अनुसार, म्योर सेंट्रल कॉलेज की आधारशिला 23 सितंबर 1873 को रखी गई थी। भवन का निर्माण 1875 में शुरू हुआ और इसे पूरा होने में करीब 12 वर्ष लगे।

1888 में सेंट्रल ब्लॉक तैयार हुआ, जिस पर करीब आठ लाख 89 हजार 627 रुपये खर्च हुए थे। बाद में यही परिसर उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ और विश्वविद्यालय को ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कहा जाने लगा।

बीए-बीएससी से एआई और डेटा साइंस तक

इलाहाबाद विश्वविद्यालय करीब 200 इलेक्टिव पाठ्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को अपने मूल विषय से आगे नई विधाओं को समझने का अवसर दे रहा है। लगभग 10 इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम, योग एवं पोषण, डेटा साइंस, आपदा प्रबंधन, खाद्य एवं पोषण जैसे विषय शुरू किए गए हैं। बीए-बीएड जैसे कार्यक्रमों के जरिए शिक्षा को रोजगार और कौशल से जोड़ने की कोशिश है।

हाईड्रोपोनिक खेती, हर्बल कॉस्मेटिक्स, एआई एवं डिजिटल साक्षरता, जैव उर्वरक, उद्यमिता, जीआईएस, पाइथन, कोडिंग, भूगोल विज्ञान और डेटा विश्लेषण जैसे पाठ्यक्रम भी विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी जरूरतों से जोड़ रहे हैं।

पांच करोड़ के इनक्यूबेशन सेंटर से नए अवसर

विश्वविद्यालय में करीब पांच करोड़ रुपये के अनुदान से इनक्यूबेशन सेंटर को मजबूत करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता से जोड़ना है। एआई, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, अर्बन प्लानिंग, पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में भविष्य की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

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विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक देश को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, साहित्यकार, न्यायविद और प्रशासक देने वाली यह संस्था अब अपनी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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