

High Court Sugarcane Allocation Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गन्ना आवंटन में भेदभाव का आरोप लगाने वाली बदायूं की यदु शुगर लिमिटेड की याचिका स्वीकार करते हुए गन्ना आयुक्त को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि गन्ने का आवंटन चीनी मिलों की स्थापित क्षमता के अनुरूप होना चाहिए। न्यायमूर्ति जेने मुनिर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
यदु शुगर लिमिटेड की मिल सुजानपुर-बिसौली में स्थित है। कंपनी की स्थापित पेराई क्षमता प्रतिदिन 7000 टन है। कंपनी के अनुसार गन्ना आयुक्त की ओर से 15 अक्टूबर 2020 और 14 अक्टूबर 2025 के कार्यालय ज्ञापनों में वर्ष 2025-30 के लिए उसकी अनुमानित गन्ना आवश्यकता 100.80 लाख क्विंटल तय की गई थी।
याचिका में कंपनी की ओर से कहा गया कि प्रदेश की आठ चीनी मिलों में से सात को उनकी अनुमानित आवश्यकता के मुकाबले 100 प्रतिशत से अधिक गन्ना आवंटित किया गया, जबकि यदु शुगर लिमिटेड को पर्याप्त गन्ना नहीं दिया गया। कंपनी ने इसे भेदभावपूर्ण नीति बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याची के अधिवक्ता दीपतिमान सिंह ने कोर्ट को बताया कि पिछले दस वर्षों में मिल की अनुमानित गन्ना आवश्यकता में कोई कमी नहीं हुई। इसके बावजूद कम आवंटन किए जाने से मिल का ड्रॉल प्रतिशत गिर गया। परिणामस्वरूप मिल को चार-पांच साल में घाटा उठाने के बाद बंद करना पड़ा। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा दाखिल चार्ट का हवाला देते हुए आवंटन में असमानता का आरोप लगाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि कल्याणकारी राज्य की नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे मौजूदा चीनी मिलों को बचाया जा सके और नई मिलों के लिए भी रास्ता खुला रहे। कोर्ट के निर्देश के बाद अब गन्ना आवंटन की प्रक्रिया में मिलों की क्षमता और आवश्यकता को प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है। आदेश से चीनी उद्योग में समान अवसर और पारदर्शी आवंटन को लेकर महत्वपूर्ण संदेश गया है।